टोंक में विस्फोटकों का जखीरा मिलने से मचा हड़कंप: एनआईए और आईबी ने संभाली कमान, दिल्ली कार ब्लास्ट से जुड़ रहे तार
टोंक में 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट और विस्फोटकों के जखीरे की बरामदगी के बाद एनआईए (NIA) और आईबी (IB) ने जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार आरोपी सुरेंद्र और सुरेंद्र मोची से अवैध खनन और दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन के एंगल पर पूछताछ जारी है। टोंक पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखा है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

टोंक (कमलेश सैनी)। राजस्थान के टोंक जिले में पुलिस की स्पेशल टीम द्वारा बरामद किए गए विस्फोटकों के भारी जखीरे ने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के उच्चाधिकारियों ने टोंक में डेरा डाल दिया है। बुधवार को चिरौंज गांव के पास से जब्त की गई 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट की खेप ने न केवल स्थानीय पुलिस बल्कि दिल्ली तक की सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि हाल ही में दिल्ली में हुए कार ब्लास्ट में भी इसी खतरनाक रसायन के इस्तेमाल की पुष्टि हुई थी।
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब जिला विशेष टीम (DST) ने एक गुप्त सूचना के आधार पर बरौनी थाना क्षेत्र के चिरौंज गांव में घेराबंदी कर एक कार को रोका। कार की तलाशी लेने पर पुलिस के होश उड़ गए जब उसमें से 150 किलो अमोनियम नाइट्रेट सहित भारी मात्रा में विस्फोटकों का जखीरा बरामद हुआ। मौके से पुलिस ने दो संदिग्धों, सुरेंद्र और सुरेंद्र मोची को गिरफ्तार किया। जैसे ही यह खबर दिल्ली तक पहुंची, जयपुर से एनआईए और आईबी की टीमें तुरंत हरकत में आईं। शुक्रवार अल सुबह करीब 6 बजे एनआईए के अधिकारियों की टीम बरौनी थाने पहुंची, जहाँ उन्होंने गिरफ्तार आरोपियों के आपराधिक और पारिवारिक रिकॉर्ड को खंगालते हुए उनसे मैराथन पूछताछ शुरू की।
पुलिस अधीक्षक राजेश मीना ने मामले की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने विस्फोटक को किसी 'मैग्जीन' (विस्फोटक भंडारण केंद्र) से लाना स्वीकार किया है। यद्यपि प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस विस्फोटक की सप्लाई पहाड़ियों में चल रहे अवैध खनन के लिए की जानी थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे केवल खनन तक सीमित मानकर नहीं चल रही हैं। अधिकारी इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहे हैं कि क्या इन आरोपियों ने पहले भी अन्य शहरों में विस्फोटक सप्लाई किया है और क्या इनके तार किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े हैं।
कानूनी प्रक्रिया के तहत बरौनी पुलिस ने आरोपी सुरेंद्र और सुरेंद्र मोची को स्थानीय अदालत में पेश किया, जहाँ से उन्हें गहन पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। फिलहाल, टोंक पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से इस पूरे रैकेट की जड़ों तक पहुँचने का प्रयास कर रही हैं। विस्फोटक की इतनी बड़ी मात्रा का सरेआम परिवहन करना सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में एनआईए की जांच इस मामले में कई और चौंकाने वाले खुलासे कर सकती है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि इस जखीरे का वास्तविक गंतव्य और उद्देश्य क्या था।

Pratahkal Bureau
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