टोंक: 90 लाख की साइबर ठगी का भंडाफोड़, 100 फर्जी सिम के साथ 2 ठग गिरफ्तार
ऑपरेशन हंटर के तहत टोंक पुलिस ने चतरपुरा और खोहल्या निवासी दो आरोपियों को पकड़ा, कब्जे से दो पावर बाइक और फर्जी बैंक दस्तावेज बरामद।

टोंक। राजस्थान पुलिस मुख्यालय द्वारा साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन हंटर' के तहत टोंक जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने करीब 90 लाख रुपए के साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए दो अंतरराज्यीय ठगों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी लिंक और सोशल मीडिया के माध्यम से आमजन को अपनी ठगी का शिकार बनाते थे। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो पावर बाइक, भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
यह पूरी कार्रवाई टोंक पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीना एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रतन लाल भार्गव के निर्देशन तथा टोंक डीएसपी मृत्युंजय मिश्रा के सुपरविजन में अंजाम दी गई। डीएसटी प्रभारी ओमप्रकाश चौधरी के नेतृत्व में टीम ने देर रात पुरानी टोंक थाना क्षेत्र में दबिश देकर उनियारा थाना क्षेत्र के चतरपुरा निवासी नमोनारायण उर्फ नमो (19) पुत्र रामफूल मीणा और बनेठा थाना क्षेत्र के खोहल्या निवासी आकाश (20) पुत्र रामेश्वर मीणा को दबोच लिया। पकड़े गए इन आरोपियों के विरुद्ध राष्ट्रीय साइबर अपराध (एनसीआरपी) पोर्टल पर पहले से ही करीब 21 ऑनलाइन शिकायतें दर्ज हैं।
आरोपियों के मॉडस ऑपरेंडी का खुलासा करते हुए पुलिस ने बताया कि ये ठग टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए फर्जी ट्रेड लिंक, सेक्सटॉर्शन और फर्जी बीमा कंपनियों के नाम पर लोगों को मैसेज भेजते थे। मोटे मुनाफे का लालच देकर ये लोगों को जाल में फंसाते थे और उनके बैंक खातों में सेंधमारी करते थे। जांच के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन से यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उन्होंने वारदात को अंजाम देने के लिए अलग-अलग नामों से जारी 100 से अधिक फर्जी सिम कार्ड का उपयोग किया था। पुलिस ने इनके पास से विभिन्न बैंकों की फर्जी पासबुक, एटीएम कार्ड, आधा दर्जन मोबाइल फोन और दो पावर बाइक जब्त की हैं।
वर्तमान में पुरानी टोंक थाना पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस प्रशासन अब इन शातिर ठगों को रिमांड पर लेकर गहनता से पूछताछ कर रहा है। साइबर नेटवर्क की जड़ें टटोलने के साथ ही पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के दौरान कई अन्य बड़े साइबर घोटालों और गिरोह के अन्य सदस्यों के नामों का खुलासा हो सकता है।

