न्याय की दहलीज पर जब शब्दों ने साथ छोड़ दिया, तो खामोशी ने सच की गवाही दी। टोंक की स्पेशल कोर्ट (अनुसूचित जाति-जनजाति) की महिला जज आरती माहेश्वरी ने मूक-बधिर युवती से दुष्कर्म के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई है। शुक्रवार को सुनाए गए इस फैसले में जज ने न केवल न्याय की शक्ति दिखाई, बल्कि कविता के माध्यम से पीड़िता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए एक सशक्त सामाजिक संदेश भी दिया।

यह मामला 19 मई 2024 का है, जब टोंक के भवानीपुरा निवासी 52 वर्षीय रामलाल ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर एक 20 वर्षीय मानसिक व शारीरिक रूप से कमजोर मूक-बधिर युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया। घटना के वक्त पीड़िता घर में अकेली थी। आरोपी ने इस स्थिति का फायदा उठाकर घर में प्रवेश किया और दरिंदगी को अंजाम दिया। हालांकि, पीड़िता के चीखने के प्रयासों और संघर्ष के बीच ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए मौके पर ही आरोपी को दबोच लिया और उसकी पहचान उसके पास मौजूद दस्तावेजों से रामलाल के रूप में हुई।

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील मेघराज जाट ने अदालत के समक्ष 16 गवाह, 33 दस्तावेज और 5 अन्य ठोस सबूत पेश किए। पुलिस ने घटना के लगभग दो महीने बाद 24 जुलाई 2024 को कोर्ट में चालान पेश किया था। समस्त तथ्यों और साक्ष्यों का अनुशीलन करने के पश्चात जज आरती माहेश्वरी ने रामलाल को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 1.25 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। साथ ही, अदालत ने पीड़िता के परिजनों को 'पीड़ित प्रतिकर स्कीम' के तहत समुचित आर्थिक सहायता प्रदान करने की अनुशंसा भी की है।

इस फैसले की सबसे विशिष्ट कड़ी जज द्वारा लिखित वह कविता रही, जिसने न्याय के मानवीय चेहरे को उजागर किया। जज ने अपनी पंक्तियों में लिखा— "वो बोल न सकी पर सच चुप न रहा, खामोशी ने भी अपराधी को पहचाना, नजरों की भाषा में सच उजागर हुआ, हर संकेत ने अपराध को बेनकाब किया। आई फिर एक रोशनी, बहिन बनी आधार, थामा उसका हाथ जब, टूटा सारा अंधकार। मौन सही पर हार नहीं, रूह रही मजबूत, हर अन्याय के सामने, सच रहता है अटूट। मत समझो उसको कमजोर, उसमें भी शक्ति घोर, हर निःशब्द की यह पुकार, सम्मान ही उसका है अधिकार। न्याय की राह जगानी है, हर आवाज सुनवानी है, अब वक्त है आवाज उठाने का, हर खामोश को न्याय दिलाने का।" यह निर्णय न केवल एक अपराधी को उसके किए की सजा देता है, बल्कि समाज को यह चेताता है कि न्याय की नजरों में खामोशी की भी अपनी एक मुखर भाषा होती है।

Next Story