टोंक। डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर अपराधी मासूम लोगों की मेहनत की कमाई पर सेंध लगाने के लिए नए-नए पैंतरे अपना रहे हैं। राजस्थान के टोंक जिले में उनियारा थाना पुलिस ने एक ऐसी ही बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए सोशल मीडिया के जरिए ठगी का साम्राज्य चलाने वाले एक शातिर जालसाज को बेनकाब किया है। पुलिस ने कम समय में पैसा दोगुना करने का लालच देकर लोगों को कंगाल करने वाले आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए गैजेट्स और अन्य सामग्री बरामद की है।

इस पूरे ऑपरेशन की कमान टोंक एसपी राजेश मीणा और एएसपी रतनलाल भार्गव के दिशा-निर्देशों में डीवाईएसपी आकांक्षा कुमारी संभाल रही थीं। उनकी देखरेख में गठित उनियारा पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी विश्लेषण और जमीनी सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपी राहुल मीणा को दबोच लिया। आरोपी राहुल मीणा ने सोशल मीडिया और विशेष रूप से टेलीग्राम पर अपना जाल फैला रखा था, जहां वह 'इन्वेस्टमेंट' के नाम पर लोगों को ऊंचे रिटर्न का सपना दिखाता था।

एएसपी रतनलाल भार्गव ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि राहुल मीणा टेलीग्राम पर फर्जी चैनल बनाकर अनजान लोगों को अपने जाल में फंसाता था। वह निवेशकों को यह भरोसा दिलाता था कि यदि वे उसके बताए तरीके से निवेश करेंगे, तो उन्हें कुछ ही समय में कई गुना मुनाफा होगा। जैसे ही कोई व्यक्ति उसके झांसे में आकर पैसे भेजता, राहुल उस राशि को अपने दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देता था। इसके बदले में वह उन खाताधारकों को निश्चित कमीशन देता था ताकि पुलिस की नजरों से बचा रह सके।

पुलिस की शुरुआती जांच में अब तक कुल 7.40 लाख रुपये की साइबर ठगी का खुलासा हुआ है। आरोपी के पास से पुलिस ने 2 एंड्रॉइड मोबाइल फोन, महत्वपूर्ण बैंक दस्तावेज, एटीएम कार्ड और एक मोटरसाइकिल जब्त की है। इन दस्तावेजों के जरिए पुलिस अब उन बैंक खातों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है जिनका इस्तेमाल लेनदेन के लिए किया गया था।

फिलहाल पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी राहुल मीणा से गहनता से पूछताछ कर रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उन चेहरों को बेनकाब करना है जो आरोपी को फर्जी सिम कार्ड और फर्जी बैंक खाते उपलब्ध कराते थे। इस कार्रवाई ने क्षेत्र में सक्रिय साइबर अपराधियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। वहीं, पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर मिलने वाले किसी भी संदिग्ध निवेश के प्रलोभन में न आएं और किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच जरूर करें। सतर्कता ही साइबर ठगी से बचने का सबसे सशक्त माध्यम है।

Next Story