Aaj Ka Mandi Bhav: गेहूं और सरसों ने भरी उड़ान, बाजरा और मूंगफली ने तोड़ी किसानों की कमर; जानिए राजस्थान का बाजार भाव
राजस्थान मंडी भाव 2026: 20 जनवरी तक गेहूं और सरसों ने तोड़े रिकॉर्ड, एमएसपी से ऊपर पहुंचा बाजार। वहीं, बाजरा, मक्का और मूंगफली के गिरते दामों ने बढ़ाई किसानों की चिंता। जानिए राजस्थान के सभी जिलों का ताज़ा मंडी अपडेट और जिंसों का हाल।

जयपुर | मरुधरा की मंडियों में इन दिनों दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां रबी की प्रमुख फसलों की चमक से अन्नदाता के चेहरे खिले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ खरीफ की उपज के दाम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे लुढ़कने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई दे रही हैं। 18 जनवरी 2026 तक के ताजा आंकड़ों ने बाजार की जो तस्वीर पेश की है, वह न केवल चौंकाने वाली है बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मौजूदा नब्ज को भी टटोलती है।
गेहूं और सरसों में जबरदस्त उछाल: समर्थन मूल्य से आगे निकला बाजार
राजस्थान की मंडियों में इस समय 'पीला सोना' यानी सरसों और रबी का राजा 'गेहूं' अपनी बादशाहत कायम किए हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2,425 रुपये तय किया गया है, लेकिन बाजार की मांग ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मंडियों में गेहूं 2,593 रुपये से लेकर 2,751 रुपये प्रति क्विंटल तक के भाव पर बिक रहा है। यह उछाल स्पष्ट संकेत देता है कि बाजार में गेहूं की भारी मांग है और किसान सरकारी खरीद का इंतजार करने के बजाय खुले बाजार में उपज बेचना पसंद कर रहे हैं।
यही हाल सरसों का भी है। 5,950 रुपये के एमएसपी के मुकाबले सरसों का बाजार भाव 6,386 रुपये से 6,765 रुपये के बीच चल रहा है। तिलहन के बाजार में आई यह तेजी किसानों के लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।
बाजरा और मूंगफली में मंदी की मार: एमएसपी से कोसों दूर दाम
बाजार की दूसरी तस्वीर बेहद निराशाजनक है। मोटे अनाज और मूंगफली के किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
- बाजरा: राजस्थान की प्रमुख फसल बाजरा का समर्थन मूल्य 2,775 रुपये है, लेकिन मंडियों में इसकी बोली मात्र 2,190 से 2,209 रुपये के बीच लग रही है। प्रति क्विंटल 500 रुपये से अधिक का यह घाटा किसानों की कमर तोड़ने के लिए काफी है।
- मूंगफली: मूंगफली के हालात और भी चिंताजनक हैं। 7,263 रुपये के समर्थन मूल्य वाली यह फसल बाजार में महज 5,900 रुपये के आसपास संघर्ष कर रही है।
- मक्का: मक्का किसान भी मंदी की चपेट में हैं। 2,400 रुपये के एमएसपी के सामने उन्हें 1,698 से 1,998 रुपये के भाव से संतोष करना पड़ रहा है।
मंडियों का हाल: प्रमुख जिंसों के भाव (20 जनवरी 2026 तक)
फसल | एमएसपी/बेंचमार्क (₹) | बाजार भाव (₹) | स्थिति |
गेहूं | 2,425 | 2,593 - 2,751 | ▲ (लाभ) |
सरसों | 5,950 | 6,386 - 6,765 | ▲ (लाभ) |
कपास | 7,710 | 7,459 - 7,739 | ▬ (समान) |
बाजरा | 2,775 | 2,190 - 2,209 | ▼ (नुकसान) |
मूंगफली | 7,263 | 5,909 - 5,914 | ▼ (नुकसान) |
सोयाबीन | 5,328 | 4,650 - 4,808 | ▼ (नुकसान) |
कपास और तिल: उम्मीद की किरण
कपास के भावों में स्थिरता देखी गई है। 7,710 रुपये के एमएसपी के इर्द-गिर्द (7,459-7,739 रुपये) कारोबार हो रहा है, जो किसानों के लिए राहत की बात है। वहीं, तिल के भावों में गिरावट जरूर है (एमएसपी 9,846 के मुकाबले 8,033-8,400 रुपये), लेकिन आवक कम होने के कारण बाजार अभी स्थिर बना हुआ है।
18 जनवरी 2026 तक के ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि बाजार में भारी असंतुलन बना हुआ है। जहां गेहूं और सरसों की तेजी ने रबी सीजन के लिए सकारात्मक माहौल बनाया है, वहीं बाजरा और मूंगफली जैसे खरीफ उत्पादों के गिरते दाम सरकारी खरीद तंत्र की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करते हैं। यदि समय रहते बाजरा और मक्का के दामों में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा असर आगामी बुवाई और ग्रामीण क्रय शक्ति पर देखने को मिल सकता है।

Ruturaj Ravan
यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।
