कोटा। माँ भारती पी.जी. कॉलेज, कोटा के शिक्षा विभाग में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत “बहुभाषिक एवं विविध कक्षाओं में शिक्षण कौशल का सशक्तिकरण” विषय पर तीन दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का शुभारंभ शनिवार को विधिवत रूप से किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुई, जिसने वातावरण को ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।

कार्यशाला की संयोजक डॉ. अरशी अब्बासी ने सत्र की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इस पहल के उद्देश्य और विषय-वस्तु पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को बहुभाषिक कक्षाओं में प्रभावी शिक्षण विधियाँ अपनाने के लिए प्रशिक्षित करना है, जिससे शिक्षा अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बन सके।

कॉलेज की प्राचार्य डॉ. श्वेता सक्सेना ने अपने प्रेरक उद्बोधन में मातृभाषा और बहुभाषिकता के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने प्रसिद्ध अकबर–बीरबल कथा का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे बीरबल ने एक विद्वान की मातृभाषा उसकी भावनात्मक प्रतिक्रिया से पहचान ली थी। डॉ. सक्सेना ने कहा, “सच्ची भाषा वह होती है जो हृदय से निकलती है — यही मातृभाषा व्यक्ति की पहचान और सीखने का सबसे सशक्त माध्यम बनती है।” उन्होंने आगे कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 की आत्मा ही बहुभाषिकता है, जिसका लक्ष्य है प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी अपनी भाषा में सीखने का अवसर देना और उसे उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मधु भारद्वाज, प्राचार्य, हितकारी टी.टी. कॉलेज, कोटा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 शिक्षा को समाज और जीवन से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने कहा कि अनुभवाधारित और मूल्यनिष्ठ शिक्षा ही एक संवेदनशील और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण की आधारशिला रख सकती है।

मुख्य वक्ता डॉ. कंचन गोयल, प्राचार्य, माँ भारती टी.टी. कॉलेज, कोटा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि “शिक्षक भविष्य निर्माण की धुरी हैं।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षकों के प्रशिक्षण और बहुभाषिक शिक्षण कौशल में सशक्तिकरण से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्यशाला के प्रथम सत्र में पाँचवें सेमेस्टर के प्यूपिल-टीचर्स ने विभिन्न विषयों पर आइस-ब्रेकिंग एक्टिविटी प्रस्तुत की, जिसने शिक्षण वातावरण को संवादात्मक और जीवंत बना दिया। कार्यक्रम का संचालन दीया भाटिया और जहान्वी गौतम ने किया, जबकि तकनीकी प्रबंधन का दायित्व आईटी प्रभारी विराट श्रींगी ने सफलतापूर्वक निभाया।

तीन दिवसीय यह कार्यशाला शिक्षा के क्षेत्र में बहुभाषिकता की नई संभावनाओं को उजागर करने की दिशा में एक प्रेरक कदम मानी जा रही है। शिक्षण कौशल के इस सशक्तिकरण से न केवल शिक्षक बल्कि विद्यार्थी भी शिक्षा के नए आयामों को समझने में सक्षम होंगे।

Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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