जैसलमेर, 21 दिसंबर 2025। मरुधरा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक भूमि लौद्रवा स्थित गरवाजी मंदिर धाम में रविवार को अखिल भारतीय कुमावत संत श्री गरवाजी सेवा समिति की कार्यकारिणी बैठक गरिमामय वातावरण में संपन्न हुई। समिति अध्यक्ष अर्जुनलाल रसिड की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में मंदिर के ongoing निर्माण एवं विकास कार्यों की व्यापक समीक्षा की गई और उन्हें समाजहित से जोड़ते हुए समयबद्ध, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने का दृढ़ संकल्प लिया गया।

बैठक के दौरान कार्यकारिणी सदस्यों ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और निर्धारित मापदंडों पर विस्तार से चर्चा की। सदस्यों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि गरवाजी मंदिर का विकास केवल संरचनात्मक निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह समाज की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और भावी पीढ़ियों के लिए एक स्थायी धरोहर के रूप में विकसित किया जाएगा। आगामी आवश्यक कार्यों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए।

इस अवसर पर समाजसेवी सोहनलाल लखेसर ने गरवाजी मंदिर में चल रहे विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए चार लाख रुपये की सहयोग राशि की घोषणा कर बैठक को विशेष गरिमा प्रदान की। उनकी इस उदार पहल पर समिति एवं उपस्थित समाजबंधुओं ने हर्ष व्यक्त किया। समिति की ओर से सोहनलाल लखेसर का पारंपरिक साफा एवं अर्पणा पहनाकर सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए समिति के महामंत्री मूलाराम मंगल ने कहा कि गरवाजी मंदिर का निर्माण केवल ईंट और पत्थर का कार्य नहीं, बल्कि यह समाज की सामूहिक आस्था, संस्कृति और एकता का प्रतीक है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग से तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया, ताकि यह कार्य निर्धारित समय में भव्य स्वरूप ले सके। वहीं कोषाध्यक्ष लीलाधर पोड़ ने समिति की नवाचार पहल की जानकारी देते हुए बताया कि इस प्रयास का उद्देश्य समाज के हर व्यक्ति को मंदिर विकास से जोड़ना और पारदर्शिता के साथ कार्यों को आगे बढ़ाना है।

बैठक के समापन पर अध्यक्ष अर्जुनलाल रसिड ने सभी कार्यकारिणी सदस्यों एवं समाजबंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सामूहिक सहयोग से ही गरवाजी मंदिर के विकास कार्य समाजहित में सफलतापूर्वक पूर्ण होंगे। बैठक में मांगीलाल दुगट, गणपतलाल बोरावट, प्रागाराम बोरावट, रेवंतराम मंगलराव, शंकरलाल, उपाध्यक्ष निंबाराम बोरावट, कुन्दनलाल भटिया, अमानाराम बोरावट, नखताराम आरोड़, श्याम लखेसर, रमण बोरावट, राव पूर्णदान, घनश्याम दास, कैलाश बोरावट, हनुमान सहित अनेक समाजबंधुओं की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक सशक्त बनाया।

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