151वां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान रिद्धि-सिद्धि नगर में संपन्न — सहस्त्रनाम अभिषेक, विश्व शांति महायज्ञ और भव्य शोभायात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सागर
कोटा के रिद्धि-सिद्धि नगर में 151वां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान सहस्त्रनाम अभिषेक, शांतिधारा और विश्व शांति महायज्ञ के साथ संपन्न हुआ। भव्य शोभायात्रा, समाजसेवियों का सम्मान और पूज्य विनयश्री माताजी के प्रवचन ने आयोजन को आध्यात्मिक भव्यता प्रदान की।

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी में भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से ओतप्रोत वातावरण के बीच 151वां श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य समापन हुआ। दिगंबर जैन समाज की इस ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा का समापन सहस्त्रनाम अभिषेक, शांतिधारा और विश्व शांति महायज्ञ के आयोजन के साथ हुआ, जिसमें समाजजनों ने विश्व में शांति, सद्भावना और मंगलकामना की प्रार्थना की।
समारोह की शुरुआत प्रातः भगवान जिनेन्द्र के सहस्त्रनाम अभिषेक एवं शांतिधारा से हुई। इसके पश्चात विश्व शांति महायज्ञ संपन्न हुआ, जिसमें समाज के वरिष्ठजनों, साधक-श्रावकों और महिलाओं ने भावपूर्ण सहभागिता निभाई।
मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा ने बताया कि समापन अवसर पर विशिष्ट समाजसेवियों को अलंकरण कर सम्मानित किया गया। समाज रत्न की उपाधि से पदम बडला, प्रकाशचंद मेहरूवाला और मनोज जैन जैसवाल को “दानवीर” की उपाधि प्रदान की गई, जबकि अशोक सांवला को “वीरशिरोमणी” की उपाधि से विभूषित किया गया। यह सम्मान विराग विभाश्री छात्रावास (श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन परमार्थिक ट्रस्ट), श्री 1008 चंद्र दिगंबर जैन मंदिर समिति तथा सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से संयुक्त रूप से प्रदान किया गया।
मंत्री पंकज खटोड ने बताया कि पादप्रक्षालन का सौभाग्य मनोज–आशीष जैन जैसवाल परिवार को तथा महाआरती का सौभाग्य श्रावक-श्रेष्ठि पदम जैन–सीता जैन और विनोद–श्रद्धा जैन बनेठा परिवार को प्राप्त हुआ।
ताराचंद बडला ने जानकारी दी कि समापन दिवस पर भगवान श्रीजी को समोशरण से रथ पर विराजमान कर नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बीस बग्गियाँ और चार बैंड दल शामिल रहे। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण सौधर्म इन्द्र परिवार रहा, जो गजराज पर सवार होकर भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र बना। कुबेर, ईशान इन्द्र, माहेन्द्र, सानत्कुमार इन्द्र, चक्रवर्ती श्रीपाल–मैनासुंदरी सहित अनेक विशेष पात्रों के परिवार पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर इस यात्रा का हिस्सा बने।
धर्मसभा में पूज्य गुरु माँ 105 विनयश्री माताजी ने प्रवचन देते हुए कहा कि यह विधान भगवान चंद्रप्रभु की कृपा से सानंद संपन्न हुआ है। उन्होंने गुरु सेवा संघ के सभी कार्यकर्ताओं की निष्ठा और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यदि युवा पीढ़ी इसी श्रद्धा से धर्म सेवा में तत्पर रहेगी, तो भगवान महावीर स्वामी का शासन सदैव जयवंत रहेगा और जैन धर्म का गौरव सदा अमिट रहेगा।
कार्यक्रम के समापन पर पूज्य माताजी ने समाजजनों को धर्मवृद्धि का आशीर्वाद देते हुए सभी के जीवन में उन्नति, सद्भाव और शांति की कामना की। इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला सहित सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया और बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।
रिद्धि-सिद्धि नगर में सम्पन्न यह धार्मिक आयोजन न केवल श्रद्धा और आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि इसने समाज में एकता, सहयोग और धार्मिक चेतना के नए संकल्प भी जगाए।
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