कोटा।

रिद्धि-सिद्धि नगर रविवार को आध्यात्मिक ऊर्जा और धर्ममय वातावरण से आलोकित हो उठा, जब यहां आयोजित श्री 151 मंडलीय सिद्ध चक्र महामंडल विधान के छठवें दिन परम पूज्य आचार्य श्री प्रज्ञासागर ससंघ जी महाराज का मंगल आगमन हुआ। इस अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सहित जैन समाज के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने संत-संघ के दर्शन कर स्वयं को धन्य अनुभव किया।

विराग विभाश्री छात्रावास, ऋद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी, कोटा एवं श्री सकल दिगंबर जैन समाज समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह आयोजन अष्टान्हिका महापर्व के अंतर्गत धार्मिक भव्यता और अनुशासन का अद्भुत संगम बना। इस अवसर पर 18 जैन संघों का सानिध्य प्राप्त हुआ, जिनमें गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी एवं विनयश्री माताजी के नेतृत्व में 12 पिच्छी धारी संतों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

सांय 5:30 बजे चक्रवर्ती परिवार (मनोज—नेहा जैसवाल, इंद्रा विहार) की ओर से दिग्विजय यात्रा एवं महाआरती की शोभायात्रा निकाली गई, जो अशोक सावला के निवास से प्रारंभ होकर हाउसिंग बोर्ड रोड, कमला उद्यान चौराहा, एग्जॉटिका गार्डन होते हुए श्री विशुद्ध विभा लोक, रिद्धि-सिद्धि नगर में संपन्न हुई। डीजे, बैंड, ढोल और ऐरावत हाथी पर विराजमान चक्रवर्ती परिवार की यह यात्रा पूरे क्षेत्र में धार्मिक उल्लास का प्रतीक बन गई।

विधान के दौरान कुबेर इंद्र पदम, ताराचंद, अशोक, दिनेश और विपिन बड़ला ने पादपक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया, वहीं शास्त्र भेंट का सौभाग्य अशोक सावला सौधर्म इंद्र परिवार को मिला।

गणिनी आर्यिका विभाश्री माताजी ने अपने प्रवचन में कहा कि पंचमकाल के इस युग में भी दिगंबर जैन संतों के दर्शन महावीर स्वामी के साक्षात दर्शन के समान पुण्य का उदय कराते हैं। उन्होंने कहा कि चलते-फिरते परमेष्ठी संत ही समाज के लिए मोक्ष मार्ग के दीपक हैं।

आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में आर्यिका पद की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्त्री काया में आर्यिका का मार्ग चुनना अत्यंत दुर्लभ और पुण्यकारी साधना है। उन्होंने सिद्ध चक्र मंडल को सामूहिक और स्वतंत्र रूप में अद्भुत बताते हुए लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि समाधि संस्कार हेतु उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने के लिए सरकार से प्रयास किए जाएं।

अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि रिद्धि-सिद्धि नगर आज एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र बन गया है, जहां एक साथ 18 से अधिक जैनाचार्य और आर्यिका संघों का सानिध्य मिलना दुर्लभ और पवित्र अवसर है। उन्होंने कहा कि यह विधान भगवान महावीर के सिद्धांतों से जुड़ने और मोक्षमार्ग की ओर अग्रसर होने का साधन है। बिरला ने कहा कि जैन संत आज भी विश्वभर में महावीर स्वामी के संदेशों को पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं, और उनके संदेश आज के युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सहस्रों वर्ष पूर्व थे।

उन्होंने कहा कि संत समाज केवल धर्म नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, नैतिकता और सामाजिक upliftment के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। यही कारण है कि रिद्धि-सिद्धि नगर आज आस्था और संस्कार का जीवंत केंद्र बन चुका है।

इस अवसर पर राजमल पाटौदी, विमल जैन नांता, प्रकाश बज, पदम बड़ला, राजेंद्र गोधा, पंकज खटोड, ताराचंद बड़ला, जगदीश जिंदल, राकेश जैन, चेतन सर्राफ, सत्यप्रकाश बालिता और महावीर सुवालका ने दीप प्रज्वलन और चित्र अनावरण किया।

कार्यक्रम में सेवानिवृत्त न्यायाधीश जितेंद्र कुमार, निर्मल अजमेरा, महावीर बड़ला, राजकुमार पाटनी, नरेंद्र कासलीवाल, अजीत गोधा, वर्धमान कासलीवाल, अनिल मित्तल, मनीष सेठी, संजय लुहाड़िया सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

रिद्धि-सिद्धि नगर का यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बना, बल्कि जैन समाज की एकता, सेवा और अध्यात्म की अखंड परंपरा का सशक्त उदाहरण भी सिद्ध हुआ।

Pratahkal Bureau

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