सलूम्बर। लंबे समय से सेवारत शिक्षकों पर TET उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू किए जाने के फैसले को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) जिला शाखा सलूम्बर ने मंगलवार को उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत से भेंट कर विस्तृत वार्ता की और उनसे विधायी हस्तक्षेप की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा। संगठन ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार सेवा में वर्षों पहले नियुक्त शिक्षकों पर नई बाध्यता लागू करना व्यावहारिक नहीं है और इससे शिक्षकों में व्यापक असंतोष उत्पन्न हो रहा है।

जिलाध्यक्ष हिमांशु भट्ट के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने सांसद रावत को अवगत कराया कि वर्षों पूर्व मान्य शैक्षणिक योग्यताएँ प्राप्त कर सेवा में आए शिक्षक अब अचानक TET परीक्षा की बाध्यता से मानसिक और प्रशासनिक दबाव का सामना कर रहे हैं। जिला मंत्री कमल आमेटा ने बताया कि अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ (ABRSM) एवं राजस्थान स्तर पर राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) लगातार इस विषय पर भारत सरकार से पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, ताकि सेवारत शिक्षकों को इस अनिवार्यता से राहत मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने सांसद से आग्रह किया कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाकर कानूनन समाधान की दिशा में पहल करें। अतिरिक्त जिला मंत्री नरेन्द्र पटेल ने बताया कि बैठक के दौरान विभागीय विषयों और संगठनात्मक गतिविधियों पर भी सकारात्मक एवं रचनात्मक चर्चा हुई, जिससे शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि उनकी आवाज प्रभावी मंच तक पहुँचेगी।

इस मौके पर झल्लारा अध्यक्ष लक्ष्मण लाल मीणा, दिनेश हरमोर, बंशीलाल कलाल, देवीलाल पटेल, भगवानलाल पटेल, रूपलाल मीणा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। मुलाकात के साथ ही शिक्षकों की इस महत्त्वपूर्ण मांग को लेकर आंदोलनिक स्वर और तेज होने के संकेत भी मिले हैं।

Pratahkal Bureau

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