रायपुर (ब्यावर)। शिक्षा के अधिकार और बच्चों की सुरक्षा के बीच छिड़ी जंग अब रायपुर उपखंड के चांग ग्राम पंचायत स्थित बडिपोल गांव में एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर 8 किलोमीटर दूर देवनगर स्थानांतरित करने के प्रशासनिक निर्णय ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। अपनी मांग को लेकर आक्रोशित ग्रामीणों ने ब्यावर जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा को ज्ञापन सौंपकर दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि विद्यालय को पुनः बडिपोल में संचालित नहीं किया गया, तो वे सामूहिक रूप से अपने बच्चों के नाम स्कूल से कटवा लेंगे।

घटनाक्रम के अनुसार, बडिपोल स्थित विद्यालय के एक-दो कमरों में दरारें आने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से पूरे स्कूल को ग्राम देवनगर के प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया था। ग्रामीणों का तर्क है कि विद्यालय के मात्र कुछ हिस्से में मामूली क्षति है, जबकि शेष पांच कमरे पूरी तरह सुरक्षित और शिक्षण कार्य के लिए उपयुक्त हैं। ऐसे में पूरे स्कूल को गांव से दूर भेजना तर्कसंगत नहीं है। ग्रामीणों ने इस स्थानांतरण को बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बताया है, क्योंकि बडिपोल और देवनगर के बीच का रास्ता किसी दुर्गम चुनौती से कम नहीं है।

ग्रामीणों ने जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया कि छोटे बच्चों के लिए प्रतिदिन 8 किलोमीटर का सफर तय करना न केवल थकान भरा है, बल्कि जानलेवा भी है। दोनों गांवों के मध्य सघन जंगल, नदी-नाले और उबड़-खाबड़ रास्ते पड़ते हैं, जहां हर वक्त जंगली जानवरों का भय बना रहता है। विशेषकर मानसून के समय नदी-नालों में पानी की आवक होने से मासूमों के बहने या दुर्घटनाग्रस्त होने की प्रबल आशंका रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा के नाम पर स्कूल हटाकर बच्चों को और भी बड़े खतरे में झोंक दिया गया है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान पंचायत समिति सदस्य इब्राहिम काठात, जिला परिषद सदस्य व कांग्रेस प्रत्याशी अली काठात, मुराद काठात, फिरोज काठात फौजी, कमरु काठात, शकुर काठात, साबिर मोहम्मद काठात, अजरुद्दीन, राहुफ पठान, गुलजार काठात, हमीद, अय्यूब काठात, साबिर काठात, सुलेमान काठात और जमील काठात सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार शर्मा ने मामले की संवेदनशीलता को समझते हुए ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि वे इस विषय की गंभीरता से जांच करवाएंगे और बच्चों के हित में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी सुरक्षा और धरातल की चुनौतियों के बीच क्या रास्ता निकालता है।

Pratahkal Bureau

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