रायपुर मारवाड़: मौत को दावत देती कुसुम-सी योजना की हाईटेंशन लाइन, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
रायपुर मारवाड़ में प्रधानमंत्री कुसुम-सी योजना के तहत बिछाई जा रही विद्युत लाइन का ग्रामीणों ने उग्र विरोध किया है। बिराटिया कलां निवासी सिद्धांत उपाध्याय द्वारा सड़क की पटरियों पर लगाए गए टावरों से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन से इन टावरों को हटाने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर चेतावनी दी है कि सुरक्षा से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

रायपुर मारवाड़। विकास की चमक जब जनसुरक्षा पर भारी पड़ने लगे, तो वह सुविधा नहीं बल्कि संकट बन जाती है। कुछ ऐसा ही मंजर इन दिनों बिराटिया कलां से धोलीधेड़ के बीच देखने को मिल रहा है, जहां प्रधानमंत्री कुसुम-सी योजना के तहत बिछाई जा रही विद्युत लाइन ग्रामीणों के लिए काल का ग्रास बनती नजर आ रही है। सोलर ऊर्जा प्लांट से विद्युत आपूर्ति के लिए मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों की पटरियों पर खड़े किए गए विशालकाय टावर अब राहगीरों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं हैं। प्रशासन की अनदेखी और नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस निर्माण ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की ज्वाला भड़का दी है।
घटनाक्रम के अनुसार, बिराटिया कलां से बर जीएसएस वाया धोलीधेड़ तक बिजली पहुंचाने के लिए हाईटेंशन लाइन का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस परियोजना का कार्य बिराटिया कलां निवासी सिद्धांत उपाध्याय पुत्र घनश्याम लाल उपाध्याय द्वारा कराया जा रहा है। निर्माण के दौरान तकनीकी मापदंडों को दरकिनार करते हुए विद्युत टावरों को सीधे सड़क की पटरियों पर ही गाड़ दिया गया है। इससे न केवल सड़क की प्रभावी चौड़ाई कम हो गई है, बल्कि मोड़ और संकरे रास्तों पर वाहन चालकों के लिए दृष्टिबाधित होने की स्थिति पैदा हो गई है। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि यदि भारी वाहनों की आवाजाही के दौरान कोई संतुलन बिगड़ता है, तो इन टावरों से टकराकर बड़ी जनहानि होना निश्चित है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए क्षेत्र के सजग ग्रामीणों ने एकजुट होकर उपखंड अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जनहित और सुरक्षा को ताक पर रखकर लगाए गए इन पोल और टावरों को तत्काल सड़क सीमा से हटाकर सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से आहत ग्रामीणों ने कार्यस्थल पर जोरदार विरोध प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की वेदी पर आमजन की जान की बलि नहीं दी जा सकती। अब देखना यह होगा कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या समय रहते इन 'मौत के खंभों' को हटाकर ग्रामीणों को भयमुक्त आवागमन की सौगात देता है।

Pratahkal Bureau
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