Haridev Joshi University Convocation Protest : किसी भी स्नातक छात्र के लिए उसका 'दीक्षांत समारोह' जीवन के सबसे गौरवशाली क्षणों में से एक होता है, लेकिन जयपुर स्थित हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्वविद्यालय (HJU) में आयोजित हालिया समारोह विवादों और आक्रोश की भेंट चढ़ गया। 2024 और 2025 बैच के छात्रों के लिए आयोजित इस गरिमापूर्ण आयोजन का अंत हर्षोल्लास के बजाय 'मुर्दाबाद' के नारों और प्रशासनिक अव्यवस्था के बीच हुआ, जिसने न केवल छात्रों बल्कि दूर-दराज से आए उनके अभिभावकों को भी गहरे अपमान का बोध कराया।

घटनाक्रम के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दीक्षांत समारोह के लिए भव्य तैयारियां की गई थीं। छात्रों को सख्त 'ड्रेस कोड' का पालन करने के निर्देश दिए गए थे, जिसे मानते हुए कई छात्र और उनके परिवार जयपुर से बाहर के शहरों से भारी उम्मीदों के साथ कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे। समारोह की शुरुआत सुचारू रही; लगभग दो घंटे तक मुख्य अतिथियों के सारगर्भित भाषण चले और मंच से स्वर्ण पदक विजेताओं को पदक वितरित किए गए। विडंबना तब शुरू हुई जब पदक वितरण के तुरंत बाद प्रशासन ने अन्य स्नातक छात्रों को उपाधियां प्रदान किए बिना ही समारोह के समापन की घोषणा कर दी।

इस अचानक हुए निर्णय ने सभागार में उपस्थित सैकड़ों छात्रों के धैर्य का बांध तोड़ दिया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय ने उनसे वादा किया था कि सभी पंजीकृत छात्रों को समारोह के दौरान ही डिग्री प्रदान की जाएगी। जब छात्रों ने देखा कि मुख्य अतिथि प्रस्थान कर रहे हैं और उन्हें उनकी वर्षों की मेहनत का प्रमाण पत्र नहीं मिला, तो आक्रोश भड़क उठा। देखते ही देखते शांत सभागार "एचजेयू प्रशासन मुर्दाबाद" के नारों से गूंज उठा। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि कुछ छात्र अपनी मांग मनवाने के लिए मुख्य अतिथियों के काफिले के पीछे दौड़ पड़े।



प्रशासनिक कुप्रबंधन के मुख्य बिंदु :

  • अधूरी सूचना : छात्रों को पूर्व में सूचित किया गया था कि उन्हें दीक्षांत समारोह में डिग्री दी जाएगी, लेकिन मौके पर केवल स्वर्ण पदक विजेताओं को प्राथमिकता दी गई।
  • अभिभावकों का अनादर : जयपुर से बाहर से आए परिवारों ने पूरी तैयारी और गरिमा के साथ शिरकत की थी, जिन्हें बिना किसी ठोस कारण के डिग्री से वंचित रख कर अपमानित महसूस कराया गया।
  • प्रोटोकॉल की खामी : छात्रों की मांग राज्यपाल या कुलाधिपति से व्यक्तिगत रूप से डिग्री लेने की नहीं थी; वे संकाय सदस्यों द्वारा डिग्री वितरण के विकल्प पर भी सहमत थे, जिसे प्रशासन ने नजरअंदाज किया।



छात्रों के उग्र विरोध और बढ़ते दबाव के बाद प्रशासन को अपनी गलती का आभास हुआ। अंततः, प्रस्थान कर चुके अतिथियों को वापस लौटना पड़ा और पुनः डिग्री वितरण की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि, इस बीच हुए हंगामे ने संस्थान की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। स्पष्टीकरण के क्रम में यह भी सामने आया है कि छात्रों का यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध न होकर, पूरी तरह से विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यशैली और वादे से मुकरने के विरुद्ध था। एक शिक्षण संस्थान, जो स्वयं पत्रकारों और संचार विशेषज्ञों को गढ़ता है, वहां संचार और प्रबंधन की ऐसी भारी चूक भविष्य के लिए एक बड़ा सबक है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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