बर में ओरण रक्षा यात्रा का भव्य स्वागत, बुलडोजर से पुष्प वर्षा और 1 किमी लंबा रेड कार्पेट बिछाकर अभिनंदन
बर गांव में ओरण और गोचर भूमि संरक्षण के लिए आयोजित यात्रा में बुलडोजर से पुष्प वर्षा और 1 किमी रेड कार्पेट बिछाकर स्वागत किया गया

रायपुर उपखंड क्षेत्र के बर गांव में ओरण रक्षा यात्रा का ऐतिहासिक और भव्य स्वागत किया गया। गाय, गोचर भूमि, जल स्रोतों और प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के लिए निकाली गई इस यात्रा में ग्रामवासियों ने उत्साह और सम्मान का ऐसा दृश्य पेश किया कि पूरे क्षेत्र में जागरूकता और उमंग की लहर दौड़ गई। गांव के प्रवेश मार्ग पर ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच बुलडोजर से पुष्प वर्षा कर यात्रियों का स्वागत किया गया और लगभग एक किलोमीटर लंबा रेड कार्पेट बिछाकर ओरण प्रेमियों और कार्यकर्ताओं का अभिनंदन किया गया।
ओरण रक्षा यात्रा के संयोजक सुमेर सिंह सवांता ने सभा को संबोधित करते हुए ओरण भूमि के महत्व को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि ओरण केवल जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि राजस्थान की हजारों वर्ष पुरानी लोक परंपरा और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक है। यह भूमि गांववासियों द्वारा सामूहिक रूप से देवस्थल मानकर संरक्षित रखी जाती है, जिसमें पेड़-पौधों को काटना, शिकार करना या निजी उपयोग करना वर्जित होता है। इसके संरक्षण से प्राकृतिक वनस्पति, पशु-पक्षी और जल स्रोत सुरक्षित रहते हैं और यह गोचर भूमि के रूप में पशुधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
सभा में वक्ता भोपाल सिंह झलोड़ा ने ओरण भूमि के वर्तमान संकट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर ओरण की जमीन सोलर ऊर्जा कंपनियों को आवंटित की जा रही है, जिससे गांवों की गोचर भूमि समाप्त हो रही है और पशुधन, वन्य जीव और पर्यावरण पर गंभीर संकट पैदा हो गया है। उन्होंने इसे ग्रामीण जीवन प्रणाली और पारंपरिक अस्तित्व के लिए खतरा बताया।
वक्ताओं ने कहा कि जिस सरकार का गठन गाय, गोचर और राष्ट्रभक्ति के नाम पर हुआ, वही सरकार आज लाखों बीघा ओरण भूमि कंपनियों को सौंप रही है। इसके विरोध में ओरण प्रेमियों ने सरकार से तत्काल ओरण भूमि संरक्षण और कंपनियों को आवंटन रोकने की मांग की।
ओरण रक्षा यात्रा का उद्देश्य प्रदेशभर में लोगों को ओरण, गोचर और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए जागरूक करना है। यह यात्रा विभिन्न गांवों और कस्बों से होते हुए लोगों को प्रकृति संरक्षण के इस अभियान से जोड़ रही है। यात्रा आगे ब्यावर और अजमेर होते हुए जयपुर पहुंचेगी, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीण और ओरण प्रेमी राजस्थान विधानसभा का घेराव कर सरकार को ओरण भूमि बचाने का ज्ञापन सौंपेंगे।
बर और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल होकर ओरण संरक्षण के जन आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। ग्रामीणों ने संकल्प लिया है कि ओरण, गोचर और प्राकृतिक धरोहर को किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। इस ऐतिहासिक आयोजन ने ग्रामीण समाज में पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक जीवन प्रणाली के महत्व को उजागर किया।

Jagdish Mali, Raipur
नाम: जगदीश माली
वर्तमान पद: संवाददाता (रायपुर मारवाड़)
कार्यक्षेत्र: जिला पाली और जिला ब्यावर (विशेष रूप से रायपुर तहसील, जैतारण तहसील एवं इनके अंतर्गत आने वाले क्षेत्र)
बीट: स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, और बिज़नेस
परिचय
जगदीश माली राजस्थान के पाली और ब्यावर जिलों के क्षेत्रीय संवाददाता हैं। वह मुख्य रूप से रायपुर मारवाड़, रायपुर तहसील और जैतारण तहसील सहित इसके अंतर्गत आने वाले सभी ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों की खबरों को कवर करते हैं। जगदीश माली स्थानीय प्रशासन, पुलिस थाना, अस्पताल, राजनीति, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार से जुड़ी सभी प्रकार की महत्वपूर्ण खबरों की ग्राउंड रिपोर्टिंग करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
जगदीश माली को क्षेत्रीय धरातल पर समाचार संकलन और मीडिया रिपोर्टिंग का 5 साल का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने स्थानीय जनसमस्याओं, प्रशासनिक बैठकों और विकास कार्यों को निरंतर रिपोर्ट किया है।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा (12वीं पास) पूरी की है।
