डीग। पावन गोपाष्टमी के अवसर पर राजस्थान के गृह, गौपालन, पशुपालन, डेयरी एवं मत्स्य विभाग के राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने सीकरी स्थित सेवल मंदिर गौशाला और पटवन गौशाला में पहुंचकर पूरे श्रद्धाभाव से गौमाता का पूजन किया। पारंपरिक विधि-विधान के साथ उन्होंने गौमाताओं को तिलक लगाया, आरती उतारी और अपने हाथों से गुड़ व हरा चारा खिलाकर उनकी सेवा की।

इस मौके पर उन्होंने कहा कि गौमाता भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और जीवन मूल्यों का प्रतीक हैं। गौसेवा केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि करुणा, पर्यावरण संरक्षण और समर्पण का जीवन मंत्र है। बेढ़म ने कहा कि गौसेवा से बढ़कर कोई पुण्य कार्य नहीं है, क्योंकि गौमाता में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना गया है।

राज्य मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश सरकार की गौसंवर्धन के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि राजस्थान सरकार गौशालाओं के विकास, संरक्षण और गाय-आधारित कृषि मॉडल को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने गौशालाओं के संचालकों, स्वयंसेवकों और गौसेवा में समर्पित कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह समर्पण समाज के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कार्यक्रम के दौरान गृह राज्य मंत्री का स्थानीय गौसेवा समितियों, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। पुष्पमालाओं से उनका अभिनंदन किया गया और गौशाला परिसर में पारंपरिक “अन्नकूट महोत्सव” का आयोजन हुआ, जिसमें विभिन्न प्रकार के अनाज, पौष्टिक आहार, हरा चारा और प्रसाद सजाया गया। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लिया।

जवाहर सिंह बेढ़म ने अपने संबोधन में कहा कि गौसंवर्धन और संरक्षण के माध्यम से हम न केवल अपनी संस्कृति को सशक्त बना सकते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की दिशा में भी अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि हर नागरिक को गौसेवा को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए और सनातन परंपरा के इस अमूल्य सूत्र को आगे बढ़ाना चाहिए।




इस अवसर पर बड़ी संख्या में गौभक्त, स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीणजन उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम में भक्ति, संस्कृति और एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने गोपाष्टमी के इस पर्व को और अधिक दिव्यता प्रदान की।

Updated On
Next Story