जैतारण: मध्यरात्रि में मौत बनकर गिरी 11 केवी की लाइन, 17 बेजुबानों की दर्दनाक मौत से पसरा मातम
जैतारण के टुकड़ा में 11 केवी विद्युत लाइन टूटने से पशुपालक शंकर जी मैरात की 17 बकरियों की करंट लगने से मौत हो गई। कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजे और सहायता का आश्वासन दिया है। प्रशासन और विद्युत विभाग ने रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी। पढ़ें इस दर्दनाक हादसे और प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट।

जैतारण। राजस्थान के जैतारण उपखंड क्षेत्र में प्रकृति की शांति के बीच एक ऐसा भयावह हादसा हुआ जिसने न केवल एक परिवार की आजीविका छीन ली, बल्कि पूरे क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुधवार और गुरुवार की मध्यरात्रि, जब पूरा गांव गहरी नींद में था, तब टुकड़ा के समीप स्थित चौकीदारों की ढाणी में मौत का तांडव हुआ। यहां ऊपर से गुजर रही 11 केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन अचानक टूटकर नीचे गिर गई, जिसकी चपेट में आने से शंकर जी मैरात की 16 से 17 बकरियों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। अंधेरे में हुए इस हादसे ने पीड़ित पशुपालक के पैरों तले जमीन खिसका दी है, क्योंकि उनकी संपत्ति और आय का एकमात्र जरिया ये बेजुबान ही थे।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौके पर जमा हो गए। दृश्य इतना हृदय विदारक था कि हर देखने वाले की आंखें नम हो गईं। सूचना पर प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी भी घटना स्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के कैबिनेट मंत्री श्री अविनाश गहलोत से दूरभाष पर संपर्क किया गया। मंत्री गहलोत ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और आश्वासन दिया कि सरकार इस कठिन समय में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि पीड़ित को नियमानुसार अधिकतम सहायता राशि जल्द से जल्द मुहैया कराई जाए।
कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को गति देते हुए विद्युत विभाग, स्थानीय पुलिस और पटवारी ने मौके पर पहुंचकर संयुक्त मुआयना किया। संबंधित विभागों द्वारा विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी गई है ताकि मुआवजा प्रक्रिया में कोई विलंब न हो। हालांकि, इस हादसे ने ग्रामीण क्षेत्रों में झूलती और जर्जर विद्युत लाइनों के रखरखाव को लेकर विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि यह तार किसी रिहायशी हिस्से या इंसान पर गिरता, तो परिणाम और भी ज्यादा भयावह हो सकते थे। वर्तमान में प्रशासन पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के प्रयासों में जुटा है, लेकिन इस आर्थिक और मानसिक आघात की भरपाई करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Pratahkal Bureau
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