जैसलमेर: सिंधी भाषा दिवस पर झूलेलाल मंदिर में संरक्षण का संकल्प
भारतीय सिंधु सभा ने संविधान की आठवीं अनुसूची में सिंधी भाषा के जुड़ाव और सांस्कृतिक विरासत के महत्व पर युवाओं को किया जागरूक।

स्थानीय झूलेलाल मंदिर के पवित्र परिसर में सिंधी भाषा दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य एवं गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें सिंधी समाज के प्रबुद्धजनों ने अपनी भाषाई विरासत और सांस्कृतिक पहचान को अक्षुण्ण बनाए रखने का दृढ़ संकल्प लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं भारतीय सिंधु सभा के प्रदेश कार्यकारी सदस्य हीरालाल साधवानी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए सिंधी भाषा के ऐतिहासिक एवं गौरवशाली महत्व पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 10 अप्रैल 1987 का दिन सिंधी समुदाय के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है, क्योंकि इसी दिन भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में सिंधी भाषा को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई थी।
विभाजन की विभीषिका का स्मरण करते हुए साधवानी ने भावुक स्वर में बताया कि उस कठिन दौर में सिंधी समाज अपनी पैतृक भूमि, अचल संपत्ति, मंदिर, गुरुद्वारे और प्राचीन सिंधु सभ्यता को सिंधु नदी के तट पर ही छोड़ आया था, किंतु विस्थापन के उस संघर्षपूर्ण समय में भी समाज अपने साथ केवल अपनी अनमोल सिंधी भाषा को ही विरासत के रूप में लेकर भारत आया। उन्होंने युवाओं और परिवारों से अपील की कि भाषा ही सिंधी समाज की वास्तविक पहचान और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसे विलुप्त होने से बचाकर आगामी पीढ़ियों तक हस्तांतरित करना प्रत्येक व्यक्ति का परम उत्तरदायित्व है। इसी कड़ी में उन्होंने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साझा करते हुए बताया कि उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह के दौरान उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने भारतीय संविधान का सिंधी भाषा में नवीनतम संस्करण जारी किया है, जो देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में उपलब्ध है।
समारोह के समापन पर उपस्थित सभी नागरिकों ने मातृभाषा के संरक्षण एवं संवर्धन की सामूहिक शपथ ली। इस अवसर पर समाज के प्रतिष्ठित सदस्य केवल ठाकवानी, रमेश हरवानी, भगवानदास वृजाणी, हीरालाल चेलानी, छतुमल होतचंदानी, होतुमल केशवानी, संजय ठाकवानी, जय वृजाणी, अमन हरवानी, लोकेश साधवानी, विनोद वृजाणी, गौरव वृजाणी, दिलीप मेघानी, तरूण वाधवानी एवं मनोज मेघानी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिन्होंने इस भाषाई उत्सव को सफल बनाया।

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