जैसलमेर। स्वर्ण नगरी के हृदय स्थल गोपा चौक में दशकों से संचालित हो रही पारंपरिक सब्जी मंडी के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। नगर परिषद और स्थानीय व्यापारियों के बीच छिड़ा यह विवाद अब गहराता जा रहा है, जिससे शहर का व्यापारिक वातावरण गर्मा गया है। नगर परिषद आयुक्त द्वारा मंडी को खाली करने के मौखिक आदेश जारी किए गए हैं, जिसमें व्यापारियों को स्पष्ट रूप से मात्र 3 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। प्रशासन ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर स्थान खाली नहीं किया गया, तो कड़ा रुख अपनाते हुए व्यापारियों का समस्त सामान जब्त कर लिया जाएगा।





नगर परिषद के इस कठोर फैसले ने मंडी में सक्रिय उन सैकड़ों परिवारों के समक्ष रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है, जिनका जीवन पूरी तरह इसी व्यापार पर टिका है। व्याकुल व्यापारियों का तर्क है कि वे पिछली तीन पीढ़ियों से इसी नियत स्थान पर बैठकर सब्जी बेच रहे हैं और अपनी आजीविका चला रहे हैं। पीढ़ियों पुराने इस व्यापारिक स्थल को अचानक छोड़ने का फरमान उनके लिए किसी बड़े मानसिक और आर्थिक झटके से कम नहीं है।

व्यापारियों ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा है कि इस विस्थापन से न केवल उनकी आय का एकमात्र स्रोत छिन जाएगा, बल्कि शहरवासियों को भी दैनिक उपभोग की सब्जियां खरीदने के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों की ओर रुख करना पड़ेगा। उन्होंने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए मांग की है कि इस ऐतिहासिक मंडी को उसके मूल स्वरूप में यथावत रहने दिया जाए। वर्तमान में इस निर्णय को लेकर व्यापारियों में भारी आक्रोश व्याप्त है और वे एकजुट होकर प्रशासन के इस कदम के खिलाफ उग्र विरोध प्रदर्शन की रणनीति तैयार कर रहे हैं। अब भविष्य के गर्भ में है कि प्रशासन इस जनभावना का सम्मान करते हुए व्यापारियों को राहत प्रदान करता है या अपने निष्कासन के फैसले पर अडिग रहता है।

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