हरी शेवा धर्मशाला का प्रेरक योगदान: माता शबरी कुटिया निर्माण हेतु दो लाख रुपये का सहयोग
भीलवाड़ा की हरी शेवा धर्मशाला ने माता शबरी कुटिया निर्माण हेतु दो लाख रुपये का योगदान दिया, जिससे श्रद्धालुओं के लिए विश्राम सुविधा सुनिश्चित होगी। संतों और समाजसेवियों ने इसे सेवा, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के संरक्षण का प्रेरक उदाहरण बताया।

भीलवाड़ा। सेवा, श्रद्धा और सनातन संस्कृति के संरक्षण में भीलवाड़ा की हरी शेवा धर्मशाला ने एक मिसाल कायम की है। माता शबरी की कुटिया के निर्माण के लिए धर्मशाला की ओर से दो लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान की गई, जो न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक सेवा और सहयोग की भावना को भी सशक्त करती है।
हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन ने बताया कि टेकरी के हनुमान, हनुमान चैकी आश्रम गुरला और बालाजी समाज सेवा समिति के संयुक्त प्रयासों से माता शबरी कुटिया का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। यह कुटिया आने वाले श्रद्धालुओं और यात्रियों के लिए विश्राम और छाया की सुविधा उपलब्ध कराएगी, जिससे उनकी आध्यात्मिक यात्रा अधिक सहज और सुखद बनेगी।
इस अवसर पर हरी शेवा धर्मशाला की ओर से सेवा भाव के साथ दो लाख रुपये का चेक महंत पुनीत दास त्यागी को भेंट किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित संतों एवं समाजसेवियों ने इस सहयोग की खुले दिल से सराहना की और इसे सनातन संस्कृति में सेवा परंपरा का जीवंत उदाहरण बताया।
संत मायाराम, संत गोविंदराम, ब्रह्मचारी इंद्रदेव, कुनाल, सिद्धार्थ, अभिमन्यु सिंह पुरावत, ओमप्रकाश बुनकर, राजू माली और अनिल सोनी सहित अनेक समाजसेवी और श्रद्धालुजन इस अवसर पर उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि ऐसे धार्मिक और सामाजिक प्रयास समाज में सहयोग, समरसता और सेवा भावना को मजबूती प्रदान करते हैं।
वक्ताओं ने कहा कि माता शबरी भारतीय संस्कृति में त्याग, भक्ति और सेवा का प्रतीक हैं। उनकी याद में बनने वाली यह कुटिया न केवल श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र बनेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को सेवा और समर्पण का संदेश भी देगी। उन्होंने समाज से आह्वान किया कि लोग आगे आकर ऐसे धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में योगदान दें।
समारोह में सनातन संस्कृति, सेवा परंपरा और सामाजिक सहभागिता को विशेष रूप से बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब समाज के विभिन्न वर्ग एकजुट होकर ऐसे कार्य करते हैं, तो क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और धार्मिक चेतना सुदृढ़ होती है। अंत में उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने हरी शेवा धर्मशाला के योगदान की सराहना करते हुए माता शबरी कुटिया निर्माण कार्य की शीघ्र पूर्णता की कामना की।
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Pratahkal Bureau
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