भारत का पहला FDRE प्रोजेक्ट: जूनिपर ग्रीन एनर्जी ने राजस्थान में शुरू की कमीशनिंग
राजस्थान और गुजरात में विस्तृत यह परियोजना सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज का संगम है, जो ग्रिड की मांग के अनुसार हरियाणा को स्वच्छ ऊर्जा की आपूर्ति करेगी।

बीकानेर में जूनिपर ग्रीन एनर्जी के मर्चेंट बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) का दृश्य, जिसने अप्रैल 2026 में अपनी परिचालन क्षमता को सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है।
राजस्थान: भारत के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के इतिहास में एक युगांतरकारी अध्याय जोड़ते हुए जूनिपर ग्रीन एनर्जी लिमिटेड ने देश के पहले फर्म एंड डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी (FDRE) प्रोजेक्ट की कमीशनिंग शुरू कर दी है। बीकानेर में भारत का पहला मर्चेंट बीईएसएस स्थापित करने की हालिया उपलब्धि के बाद कंपनी ने अब भारत सरकार की प्रमुख एफडीआरई गाइडलाइंस के तहत इस ऐतिहासिक परियोजना को धरातल पर उतारा है। राजस्थान और गुजरात की भौगोलिक सीमाओं में विस्तृत यह एकीकृत परियोजना 259 मेगावॉट पी सोलर, 280 मेगावॉट विंड और 200 मेगावॉट आवर बीईएसएस (बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम) का एक अनूठा संगम है, जिसे ग्रिड की मांग के अनुरूप सटीक, भरोसेमंद और समयबद्ध स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष रूप से अभिकल्पित किया गया है।
इस गौरवशाली अवसर पर जूनिपर ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के सीईओ अंकुश मलिक ने परियोजना के दूरगामी प्रभावों को रेखांकित करते हुए कहा कि यह भारत के पहले फर्म और डिस्पैचेबल रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट की शुरुआत है जो निर्धारित समय पर और विश्वसनीय स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के कंपनी के विजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह उपलब्धि जूनिपर की सुदृढ़ कार्य क्षमता, तकनीकी विशेषज्ञता और टिकाऊ ऊर्जा के भविष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। मलिक के अनुसार, सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज के इस एकीकरण से न केवल भारत की स्वच्छ ऊर्जा क्षमता प्रमाणित हो रही है, बल्कि यह नवाचार के नए मानक भी स्थापित कर रहा है, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का सशक्त माध्यम बनेगा।
भारत में रिन्यूएबल एनर्जी के विस्तार के साथ ग्रिड संतुलन एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा था, क्योंकि सौर ऊर्जा की अनुपलब्धता रात में और पवन ऊर्जा की अनिश्चितता डिस्कॉम के लिए बाधक थी। इसी अंतराल को पाटने हेतु विद्युत मंत्रालय ने जून 2023 में एफडीआरई गाइडलाइंस जारी की थीं, जिसके तहत डेवलपर्स को विभिन्न ऊर्जा स्रोतों को जोड़कर मांग आधारित बिजली आपूर्ति का निर्देश दिया गया। कोयला आधारित बिजली के स्वच्छ विकल्प के रूप में उभरते इस प्रोजेक्ट के प्रमुख पड़ावों की बात करें तो इसकी 259 मेगावॉट पी सोलर क्षमता ने मार्च 2026 में वाणिज्यिक परिचालन शुरू किया, जबकि 200 मेगावॉट आवर बीईएसएस क्षमता अप्रैल 2026 में क्रियान्वित हुई।
विशेष रूप से, यह परियोजना उत्तर भारत में भीषण गर्मी के दौरान हरियाणा की रिकॉर्ड बिजली मांग को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी। जूनिपर ग्रीन एनर्जी इस टेंडर को एसजेवीएन लिमिटेड की योजना के तहत प्रतिस्पर्धी रिवर्स ऑक्शन के माध्यम से प्राप्त करने वाला पहला डेवलपर बना है। कंपनी ने एसजेवीएन के साथ 200 मेगावॉट का पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) किया है, जिसके आधार पर एसजेवीएन ने हरियाणा पावर परचेज सेंटर (HPPC) के साथ बैक-टू-बैक पावर सेल एग्रीमेंट (PSA) किया है। वर्तमान में एसजेवीएन, एनएचपीसी, सेकी और एनटीपीसी जैसी संस्थाओं द्वारा 14 गीगावॉट से अधिक के एफडीआरई टेंडर जारी किए जा चुके हैं, जिनमें जूनिपर सबसे पहले बिजली सप्लाई शुरू कर एक पथप्रदर्शक बनकर उभरा है, जो भारत के ऊर्जा परिदृश्य में स्थिरता और नवाचार के एक नए युग का सूत्रपात करता है।

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