टीना डाबी ने टोंक जिला कलेक्टर का पदभार संभाला, गिनाईं अपनी प्राथमिकताएं
कार्यभार संभालने के बाद कलेक्टर ने जन शिकायतों के निस्तारण, विकसित ग्राम अभियान और आगामी जनगणना को लेकर रणनीतिक रोडमैप स्पष्ट किया।

टोंक। भारतीय प्रशासनिक सेवा की प्रतिष्ठित अधिकारी टीना डाबी ने टोंक जिला कलेक्टर के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण कर लिया है। पदभार संभालते ही उन्होंने प्रशासनिक तेवर स्पष्ट कर दिए हैं, जहां उनका मुख्य फोकस आमजन को त्वरित राहत प्रदान करने और सुशासन की स्थापना पर रहेगा। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद मीडिया से रूबरू होते हुए कलेक्टर डाबी ने अपनी कार्ययोजना की रूपरेखा प्रस्तुत की।
मुख्यमंत्री के विजन को धरातल पर उतारने के संकल्प के साथ टीना डाबी ने स्पष्ट किया कि उनकी पहली प्राथमिकता राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का निस्तारण करना है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के समाधान की केवल कागजी खानापूर्ति नहीं होगी, बल्कि शिकायतों का फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) अनिवार्य रूप से कराया जाएगा ताकि पीड़ित व्यक्ति को गुणवत्तापूर्ण और वास्तविक राहत मिल सके। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री द्वारा जनहित में शुरू किए गए “विकसित ग्राम” और “विकसित वार्ड” अभियानों को जिले में और अधिक प्रभावी बनाने के लिए वे स्वयं निरंतर समीक्षा करेंगी।
प्रशासनिक जिम्मेदारियों की चर्चा करते हुए कलेक्टर ने आगामी जनगणना को एक महत्वपूर्ण कार्यभार बताया और कहा कि इसके सफल संपादन के लिए टोंक जिला प्रशासन जल्द ही एक सुदृढ़ रणनीति तैयार करेगा। अपनी कार्यशैली को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि आगामी एक-दो दिनों में वे जिले के समस्त आला अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत चर्चा करेंगी, ताकि टोंक की स्थानीय भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों को समझकर जनहित में बेहतर निर्णय लिए जा सकें।
पश्चिमी राजस्थान में अपनी विशिष्ट कार्यशैली के लिए चर्चित रहीं टीना डाबी ने टोंक में नई जिम्मेदारी मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने विश्वास दिलाया कि टीम वर्क और जन-सहयोग के माध्यम से टोंक जिले को प्रशासन के क्षेत्र में नए आयामों पर ले जाने का प्रयास किया जाएगा। उनका यह कार्यभार संभालना टोंक के प्रशासनिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, जिससे जिले की विकास योजनाओं को नई गति मिलने की उम्मीद है।

