सारण मठ में 500 वर्षों बाद बरड वंशीय चौहान राजपूत गादीपति की ऐतिहासिक उपस्थिति, टॉडगढ़ में भव्य स्वागत और रैली
सारण मठ में 500 वर्षों के बाद बरड वंशीय चौहान राजपूत गादीपति श्री श्री 1008 आयस श्री नारायणवनजी महाराज का ऐतिहासिक आगमन। टॉडगढ़ में भव्य स्वागत, रैली और भजन संध्या के साथ क्षेत्र में धार्मिक चेतना और सामाजिक उत्साह का संचार।

जवाजा। सारण मठ के इतिहास में एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण जुड़ गया, जब लगभग 500 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्री श्री 1008 आयस श्री नारायणवनजी महाराज को मठ का गादीपति बनने का सम्मान प्राप्त हुआ। इस अवसर पर उनके प्रथम आगमन को लेकर टॉडगढ़ क्षेत्र और आसपास के गांवों में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखा गया।
श्री श्री 1008 आयस श्री नारायणवनजी महाराज का आगमन टॉडगढ़ के दौखड़ा (माथुवाड़ा) गांव में स्वर्गीय श्री लूम्बा सिंह जी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित बारहमासी सत्संग कार्यक्रम में हुआ। कार्यक्रम का आयोजन धार्मिक परंपराओं और विधि-विधान के अनुरूप संपन्न हुआ। सत्संग में श्रीमती गट्टूदेवी, सूबेदार पूनमसिंह, प्रेमसिंह और भगवानसिंह का विशेष सानिध्य रहा।
महाराज के आगमन पर ग्रामीणों ने उन्हें पुष्पमालाओं से सम्मानित करते हुए पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार भव्य स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने बताया कि सारण मठ से महाराज का यह पहला आगमन है, जिससे समाज में नई ऊर्जा और धार्मिक चेतना का संचार हुआ है।
इस पावन अवसर को और यादगार बनाने के लिए टॉडगढ़ से दौखड़ा तक भव्य रैली का आयोजन किया गया। सैकड़ों ग्रामीणों ने इस रैली में भाग लिया। जयकारों, भजनों और श्रद्धा भाव से सजी रैली ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय वातावरण में डुबो दिया। मार्ग में ग्रामीणों द्वारा पुष्पवर्षा कर महाराज का स्वागत किया गया।
महाराज की गरिमामयी उपस्थिति में भजन संध्या का आयोजन भी किया गया। संतों और श्रद्धालुओं ने भक्ति रस में भजनों का आनंद लिया। टॉडगढ़ के श्री राम भजन मंडल द्वारा प्रस्तुत भजनों ने उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम में भगवानसिंह, प्रेमसिंह, एडवोकेट मदनसिंह, देवीसिंह, नरेंद्रसिंह, प्रतापसिंह, निर्मलसिंह, सुरेशसिंह, नाथूसिंह, हेमसिंह, सरदार, लालसिंह, किशनसिंह, मनमोहनसिंह, शिवलाल, डाऊसिंह, डूंगरसिंह, जीवनसिंह, त्रिलोकसिंह, भरतसिंह, सुखदेव और जयवीर सहित बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और महिलाएं उपस्थित रहीं।
ग्रामवासियों ने इसे सारण मठ और बरड वंशीय चौहान राजपूत समाज के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। महाराज के गादीपति बनने से धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है। कार्यक्रम का समापन महाराज के आशीर्वचन और सभी के मंगलकामना के साथ हुआ।
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Pratahkal Bureau
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