आज राजस्थान दिवस के पावन अवसर पर जहाँ पूरा प्रदेश उत्सव में डूबा है, वहीं राजस्थानी सिनेमा के चर्चित अभिनेता गौरव देवासी ने एक कड़ा और भावुक संदेश जारी किया है। गौरव ने प्रदेशवासियों को बधाई देने के साथ-साथ 'मायड़ भाषा' (राजस्थानी) की उपेक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

संस्कृति की जननी भाषा के लिए संघर्ष

अभिनेता गौरव देवासी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजस्थान की पहचान उसकी शूरवीरता और संस्कृति से है, और संस्कृति की जननी उसकी भाषा होती है। उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा:

"यह बड़े सौभाग्य की बात है कि हम उस धरती के निवासी हैं जहाँ 'पधारो म्हारे देस' की संस्कृति फलती-फूलती है, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा दुर्भाग्य है कि आज भी हम अपनी मातृभाषा, राजस्थानी, को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल नहीं करवा पाए हैं। संवैधानिक दर्जे के अभाव में राजस्थानी भाषा न केवल पिछड़ रही है, बल्कि धीरे-धीरे दम तोड़ रही है।"

सिनेमा और रोजगार पर गहराता संकट

देवासी ने इस बात पर जोर दिया कि जब तक राजस्थानी को संविधान की 8वीं अनुसूची में स्थान नहीं मिलता, तब तक राजस्थानी फिल्मों और साहित्य को वह वैश्विक मंच नहीं मिल पाएगा जिसका वह हकदार है। उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग की है कि इसे केवल चुनावी मुद्दा न बनाकर जल्द से जल्द कानूनी अमली जामा पहनाया जाए।

युवाओं से मातृभाषा के स्वाभिमान की अपील

गौरव देवासी ने प्रदेश के युवाओं का विशेष आह्वान किया कि वे अपनी मातृभाषा बोलने में झिझक न करें। अपनी बात को मजबूती से रखते हुए अभिनेता ने अंत में कहा कि "भाषा है तो सम्मान है, और सम्मान है तो राजस्थान है।"

Pratahkal Bureau

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