बारां। शहर की उत्तम कॉलोनी निवासी 71 वर्षीय कौशल्या देवी अग्रवाल पत्नी स्व. नरेंद्र कुमार अग्रवाल का बुधवार रात निधन हो गया, परंतु उनके जाने के बाद भी उनकी ममता और सेवा भावना जीवित रही। निधन के उपरांत उनके पुत्रों विशाल अग्रवाल और विपिन अग्रवाल ने माँ की अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका नेत्रदान कर समाज में मानवता की अद्भुत मिसाल पेश की।

परिजनों ने बताया कि कौशल्या देवी सदैव सेवा कार्यों से जुड़ी रहीं और लोगों की सहायता को जीवन का उद्देश्य मानती थीं। इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए उनके परिवार ने नेत्रदान का संकल्प लिया, जिससे दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई रोशनी मिल सकेगी।

सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन के संयोजक हितेश खंडेलवाल के प्रयासों से डॉ. कुलवंत गौड़ और उनकी टीम कोटा से बारां पहुँची और नेत्रदान की प्रक्रिया को पूर्ण किया। इस दौरान परिवार की बेटियाँ विमला, कृष्णा, रेखा, इंद्रा और अंतिमा सहित अन्य परिजन उपस्थित रहे।

भारत विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने बताया कि यह नेत्रदान बारां में एक सप्ताह के भीतर चौथा और माह का पाँचवाँ नेत्रदान है, जो समाज में जागरूकता और मानवता की बढ़ती भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अब नेत्रदान एक मानवीय परंपरा का रूप लेता जा रहा है, जो दूसरों के जीवन में आशा और प्रकाश का संचार कर रहा है।

दिवंगत आत्मा की शांति के लिए परिवारजनों और समाजसेवियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की तथा नेत्रदान अभियान के निरंतर विस्तार की प्रार्थना की। यह घटना न केवल कौशल्या देवी अग्रवाल के परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है, जिसने “माँ की ममता” को सच्चे अर्थों में अमर कर दिया।

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Ruturaj Ravan

Ruturaj Ravan

यह प्रातःकाल मल्टीमीडिया में वेबसाइट मैनेजर और सोशल मीडिया एक्जीक्यूटिव के रूप में कार्यरत हैं, और पिछले तीन वर्षों से पत्रकारिता व डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इससे पूर्व उन्होंने दैनिक प्रहार में वेबसाइट प्रबंधन और सोशल मीडिया के लिए रचनात्मक कंटेंट निर्माण और रणनीतियों में अनुभव अर्जित किया। इन्होंने कोल्हापुर के छत्रपति शिवाजी महाराज विश्वविद्यालय से स्नातक और हैदराबाद के सत्या इंस्टीट्यूट से उच्च शिक्षा पूरी की। इन्हें SEO मैनेजमेंट, सोशल मीडिया और उससे संबंधित रणनीतियाँ तैयार करने में व्यापक अनुभव है।

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