बारां। जीवन भर सरलता, सेवा और संस्कारों की मिसाल रहे जैन श्वेतांबर स्थानकवासी समाज के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ व्यापारी केवल चंद जैन ने विदाई के क्षणों में भी समाज को मानवता का उजला संदेश दिया। 85 वर्ष की आयु में उनके देवलोकगमन के बाद परिवार ने उनके नेत्रदान का संकल्प लेकर अंतिम समय को भी सेवा और संवेदना से भरा एक प्रेरक अवसर बना दिया।

शहर की जैन कॉलोनी में स्थित निवास पर शोक में डूबे परिजनों—सुरेश कुमार, नरेश कुमार, कमल, दिलीप, अनिल, सुनील और पुत्री मधु—ने इस कठिन घड़ी में भी दिवंगत पिता की इच्छाशक्ति को आगे बढ़ाते हुए नेत्रदान के लिए सहमति दी। सूचना मिलते ही शाइन इंडिया फाउंडेशन के संयोजक हितेश खंडेलवाल सक्रिय हुए और तुरंत कोटा से संस्था के डॉ. कुलवंत गौड़ को बुलाया गया, जिन्होंने बारां पहुँचकर नेत्रदान प्रक्रिया को विधिवत एवं सफलतापूर्वक पूर्ण कराया।

भारत विकास परिषद, बारां के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल ने बताया कि समाज में चल रहे निरंतर जागरूकता अभियानों का ही परिणाम है कि बारां में नेत्रदान अब एक सशक्त सामाजिक परंपरा के रूप में उभर चुका है। उन्होंने कहा कि यह केवल दिवंगत आत्मा के प्रति श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि परिवार के मानवीय मूल्यों व सामाजिक उत्तरदायित्व का भी उल्लेखनीय उदाहरण है।

नेत्रदान के दौरान परिषद के पराग टोंग्या, विनोद जैन सहित परिवार के स्वप्निल, शालीन, संस्कार, संयम, सिद्धार्थ, सोहन, हिना, सलोनी, निराली, गजल, ऋषिका और कनन उपस्थित रहे। भावुक माहौल के बीच बच्चों ने कहा कि दादाजी द्वारा लिया गया यह अंतिम निर्णय उनके लिए आजीवन प्रेरणा रहेगा और वे भी समाजसेवा के पथ पर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।

केवल चंद जैन का यह पुनीत कार्य स्मरण कराता है कि मनुष्य अपने कर्मों से अमर होता है। उनके नेत्रदान से दो व्यक्तियों की दुनिया रोशन होगी और समाज में चेतना की वह लौ प्रज्वलित होगी, जो आने वाली पीढ़ियों को मानवता के पथ पर अग्रसर करती रहेगी।

Pratahkal Bureau

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