कोटा, 5 नवम्बर। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय (आरटीयू) कोटा के प्रांगण में आज एक गरिमामयी समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें निवर्तमान कुलगुरु प्रोफेसर भगवती प्रसाद सारस्वत को विदाई दी गई तथा नवनियुक्त कुलगुरु प्रोफेसर निमित चौधरी का स्वागत किया गया। यह अवसर भावनाओं, कृतज्ञता और नई आशाओं से परिपूर्ण रहा, जब विश्वविद्यालय परिवार ने अपने पूर्व कुलगुरु के योगदानों को स्मरण करते हुए नए नेतृत्व के प्रति उत्साह व्यक्त किया।

समारोह की जानकारी देते हुए सह जनसंपर्क अधिकारी विक्रम राठौड़ ने बताया कि इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार के सभी अधिकारी, प्राध्यापक और कर्मचारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कुलसचिव श्रीमती भावना शर्मा, वित्त नियंत्रक बाबूलाल मीणा सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्यों ने कार्यक्रम में भाग लेकर समारोह की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।

कुलगुरु प्रो. निमित चौधरी ने अपने संबोधन में प्रो. सारस्वत के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अल्प समय में ही उच्च शिक्षा जगत में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। शिक्षा में नवाचार, जनकल्याण की दिशा में किए गए प्रयास और समाजसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें एक प्रेरणास्रोत के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रो. सारस्वत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान और सामाजिक योगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।

प्रो. चौधरी ने आगे कहा कि एक कुशल प्रशासक, प्रखर वक्ता और सरल व्यक्तित्व के धनी प्रो. सारस्वत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को नई दिशा दी। उनके सहज व्यवहार, निष्पक्ष निर्णय और कर्मचारी कल्याण के प्रति समर्पण ने प्रशासनिक व्यवस्था को सशक्त बनाया। उच्च शिक्षा के प्रति उनकी दृष्टि और दूरदर्शिता से शिक्षा समुदाय को सदैव मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

अपने उत्तर संबोधन में प्रो. सारस्वत ने नवनियुक्त कुलगुरु प्रो. चौधरी को शुभकामनाएं दीं और कहा कि वे अपने व्यापक अनुभव, अकादमिक उत्कृष्टता और नेतृत्व क्षमता से राजस्थान की तकनीकी शिक्षा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएंगे। उन्होंने कहा कि जामिया मिलिया इस्लामिया में उनके कार्यकाल के दौरान जो प्रगतिशील पहलें और नवाचार हुए, वे आज भी शिक्षा जगत में मिसाल हैं।

प्रो. चौधरी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आरटीयू को एक अग्रणी तकनीकी विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने के लिए शोध, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने बल दिया कि विद्यार्थियों के कौशल विकास और व्यक्तित्व निर्माण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। शिक्षा के बदलते परिदृश्य में निरंतर सीखना और नवाचार ही सफलता की कुंजी है।

समारोह का समापन उत्साह, सम्मान और आशा के भावों के साथ हुआ, जहाँ एक ओर प्रो. सारस्वत के योगदानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई, वहीं दूसरी ओर प्रो. चौधरी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई।

Pratahkal Bureau

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