कोटा। जब किसी की जान संकट में हो और समय की हर टिक-टिक भारी पड़ रही हो, तब कुछ लोग अपने कर्म और करुणा से जीवनदान का उदाहरण पेश करते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक कार्य किया अपना ब्लड सेंटर, कोटा के टेक्निशियन वीरेंद्र मालव ने, जिन्होंने देर रात एक मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए 12वीं बार इमरजेंसी में एसडीपी डोनेशन कर मानवता की मिसाल कायम की।

घटना बीती रात की है, जब टीम जीवनदाता को ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप की मरीज सिरनम बाई के लिए एसडीपी की अत्यंत आवश्यकता थी। मरीज की प्लेटलेट्स तेजी से घट रही थीं और उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी। उनके पति किशन गोपाल मदद की तलाश में चिंतित थे। टीम के संरक्षक व लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि रात के समय उपलब्ध डोनर न मिलने पर स्थिति और गंभीर हो गई थी।

ऐसे नाजुक पल में वीरेंद्र मालव ने बिना देर किए स्वयं एसडीपी डोनेट करने का निर्णय लिया। उनके इस कदम से न केवल मरीज की जान बची बल्कि उन्होंने फिर यह साबित किया कि सच्चा सेवा भाव समय और परिस्थिति नहीं देखता। उल्लेखनीय है कि यह वीरेंद्र मालव का 12वां एसडीपी डोनेशन था, जिनमें अधिकांश उन्होंने इमरजेंसी स्थितियों में किया है। इसके अतिरिक्त वे दो बार ब्लड डोनेशन भी कर चुके हैं।

वीरेंद्र मालव का कहना है कि “जीवन बचाने से बड़ा कोई धर्म नहीं। हमारी थोड़ी सी असुविधा किसी परिवार के लिए जीवनभर की खुशी बन सकती है।” उनके इस कार्य से प्रेरित होकर अब स्वाति कश्यप, वंदना प्रजापति और दिव्या मालव भी भविष्य में ऐसे अवसरों पर रक्तदान के लिए अग्रसर हुई हैं।

टीम जीवनदाता के सेवा भाव और वीरेंद्र मालव की संवेदनशीलता ने कोटा शहर में मानवीयता का संदेश फैलाया है। यह कार्य न केवल रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि समाज में यह संदेश भी देता है कि दूसरों की मदद करने की भावना ही सच्ची इंसानियत का आधार है।

Pratahkal Bureau

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