कोटा, 31 अक्टूबर। आध्यात्मिकता और भक्ति के अद्भुत संगम का साक्षी बना श्री अग्रवाल दिगंबर जैन मंदिर, शास्त्री मार्केट, जहां शुक्रवार को परम पूज्य आचार्य 108 श्री प्रज्ञासागर जी महाराज के मंगल सान्निध्य में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का भव्य दो दिवसीय आयोजन आरंभ हुआ। मंदिर परिसर भक्ति, श्रद्धा और जैन आराधना के स्वर से गुंजायमान रहा।

मंदिर के सचिव विकास जैन मजीतिया ने बताया कि इस पवित्र विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गहन भक्ति और उत्साह के साथ भाग लिया। विधान के अंतर्गत कुल 2524 अर्घ्य समर्पित किए जाने हैं, जिनमें पहले दिन 1500 अर्घ्य श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए गए।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 8:30 बजे जिनाभिषेक और शांतिधारा से हुई, जिसके पश्चात दोपहर 1:00 बजे महामंडल विधान का प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर शांतिधारा का सौभाग्य राजेन्द्र एवं मोहित जैन कैथूनवाला परिवार को प्राप्त हुआ, जबकि सौधर्म इंद्र का गौरव चेतन–आशा, विशाल एवं अर्पित सर्राफ परिवार को मिला। पादपक्षालन का पुण्य मोहनलाल और यतीश जैन खेड़ावाला परिवार को प्राप्त हुआ।

अपने प्रवचन में आचार्य प्रज्ञासागर जी महाराज ने कहा कि जैन धर्म में सिद्धचक्र विधान का अत्यंत आध्यात्मिक और दार्शनिक महत्व है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विधान में मंत्रों और बीजाक्षरों की स्थापना के माध्यम से दिव्य शक्तियों का आवाहन किया जाता है। यह आराधना न केवल आत्मशुद्धि का माध्यम है, बल्कि समस्त सिद्ध समूहों की साक्षी में जीवन के मनोरथों की पूर्ति का भी मार्ग प्रशस्त करती है।

आयोजन में चैयरमैन यतिश जैन खेड़ावाला, गुरू आस्था परिवार के अध्यक्ष लोकेश जैन, कोषाध्यक्ष अजय जैन, राजेश जैन सर्राफ, ज्ञानचंद जैन, लोकेश जैन दमदमा, शिव कुमार जैन, संजय खटकिड़ा, जगदीश जिंदल सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के समापन पर पूरे परिसर में भक्ति, आनंद और अध्यात्म का वातावरण छा गया।

Pratahkal Bureau

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