गौरवपूर्ण वृद्धावस्था और सम्मानित जीवन हमारी संस्कृति है : केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार
आबूरोड में केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ब्रह्माकुमारीज़ के “संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था और सम्मानित जीवन” अभियान का राजस्थान स्तरीय शुभारंभ किया। तीन वर्ष तक चलने वाले इस अभियान के तहत वृद्धाश्रमों व सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से पूरे भारत में वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और जीवन मूल्यों पर जागरूकता फैलाई जाएगी।

आबूरोड, राजस्थान। ब्रह्माकुमारीज़ के शांतिवन मुख्यालय के डायमंड हॉल में रविवार को “संगम – गौरवपूर्ण वृद्धावस्था और सम्मानित जीवन” अभियान का राजस्थान राज्य स्तरीय शुभारंभ केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने किया। यह कार्यक्रम समाजसेवा प्रभाग एवं सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश से आए पांच हजार से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अवसर पर विभाग और ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के बीच तीन वर्षों के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत देशभर में वृद्धाश्रमों, समाजसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के माध्यम से जन-जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
डॉ. वीरेंद्र कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि वृद्धावस्था जीवन का अवकाश नहीं, बल्कि अनुभव और आत्मिक संतुलन का काल है। उन्होंने कहा कि बुजुर्गों को भौतिक सुख-सुविधाओं की नहीं, बल्कि अपने परिवारजनों के स्नेह, आत्मीयता और साथ की आवश्यकता होती है। उन्होंने संयुक्त परिवारों के विघटन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक परिवारों में पीढ़ियों के बीच संवाद और अपनत्व का बंधन मजबूत नहीं होगा, तब तक समाज में भावनात्मक स्थिरता नहीं आ सकती। ब्रह्माकुमारीज़ संस्था ऐसे अभियानों के माध्यम से इस चेतना को पुनर्जीवित कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मंत्रालय द्वारा ब्रह्माकुमारीज़ के साथ दो एमओयू साइन किए गए हैं और संस्था ने “नशामुक्त भारत अभियान” को जिस समर्पण और गति के साथ आगे बढ़ाया है, वह सराहनीय है। उन्होंने कहा, “जब सेवा, सहयोग और स्नेह एक साथ मिलते हैं, तो परिवर्तन स्वाभाविक रूप से होता है। गौरवपूर्ण वृद्धावस्था और सम्मानित जीवन हमारी भारतीय संस्कृति की आत्मा है।”
डॉ. कुमार ने ‘संगम’ अभियान के भावार्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका अर्थ है—पीढ़ियों का मिलन और अनुभव का संगम। उन्होंने कहा कि इस अभियान के माध्यम से संस्था ने समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—वरिष्ठ नागरिकों—के प्रति जागरूकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि “ब्रह्माकुमारीज़ में प्रवेश करना ही एक आध्यात्मिक अनुभव है, यहां की शांति और वातावरण आत्मा को सुकून देते हैं।”
जालोर-सिरोही सांसद लुंबाराम चौधरी ने कहा कि यह अभियान समाज में नई चेतना जगाएगा और संस्था द्वारा किए जा रहे कल्याणकारी कार्य प्रेरणास्पद हैं। समाजसेवा प्रभाग के केरल संयोजक प्रो. स्वामीनाथन भाई ने बताया कि अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ अगस्त 2025 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा राष्ट्रपति भवन में किया गया था। तब से अब तक देशभर में एक हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं, और आगामी तीन वर्षों में पूरे भारत को इस अभियान से जोड़ा जाएगा।
राजयोगी बीके करुणा भाई ने कहा कि घर के बुजुर्ग जब ईश्वर की याद में अधिक समय लगाते हैं तो पूरे परिवार पर सकारात्मक ऊर्जा की छाया बनी रहती है। वहीं, संयुक्त मुख्य प्रशासिका एवं समाजसेवा प्रभाग की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजयोगिनी बीके संतोष दीदी ने कहा कि सेवा, समर्पण और देने की भावना ही अमर युवावस्था का रहस्य है। उन्होंने कहा कि “जीवन को समाजसेवा में लगाएं, तब बुजुर्ग कभी वृद्ध नहीं होते।”
यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि पीढ़ियों के बीच संवेदनाओं, संस्कारों और सम्मान के पुल को फिर से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

Pratahkal Bureau
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