धौलपुर: राजस्थान कर्मचारी महासंघ का कार्य बहिष्कार, 25 सूत्री मांगों पर प्रदर्शन
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने धौलपुर में उपखण्ड कार्यालय पर प्रदर्शन कर सरकार से मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की।

धौलपुर में अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने उपखण्ड कार्यालय पर सामूहिक कार्य बहिष्कार कर अपनी 25 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया।
धौलपुर। राजस्थान सरकार की कर्मचारी-विरोधी नीतियों के विरुद्ध प्रदेश भर में पनपा आक्रोश अब धौलपुर में खुलकर सामने आ गया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ और प्रदेश संगठन महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा के आह्वान पर कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में दूसरे दिन भी तीखा विरोध प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय स्थित उपखण्ड कार्यालय और तहसील कार्यालय पर कर्मचारियों ने एक घंटे का सामूहिक कार्य बहिष्कार कर सरकार को अपनी एकजुटता का संदेश दिया।
जिला अध्यक्ष चन्द्रभान चौधरी ने इस प्रदर्शन के दौरान सरकार पर कर्मचारी हितों के प्रति उदासीनता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर कुठाराघात करने का आरोप लगाया। संगठन के प्रदेश महामंत्री डॉ. रनजीत मीणा ने स्पष्ट किया कि आरजीएचएस (RGHS) योजना का निजीकरण रोकने, बीमा कंपनियों के हस्तक्षेप पर रोक लगाने और सरेंडर लीव के भुगतान पर लगी अघोषित पाबंदी को तत्काल हटाने सहित महासंघ का 25 सूत्री मांग पत्र लंबित है। उन्होंने कर्मचारियों को जीपीएफ की राशि प्राप्त करने के लिए छह-छह महीने तक के लंबे इंतजार पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे कर्मचारियों के अपने ही धन पर अधिकारों का हनन बताया।
इस सामूहिक कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने भाग लिया। इस दौरान डॉ. वीरेंद्र सिंह यादव (जिला आयुर्वेद चिकित्सक संघ अध्यक्ष), गोपाल कृष्ण शर्मा (आयुर्वेद संघर्ष समिति अध्यक्ष), टीकम सिंह जाट (शिक्षक संघ महामंत्री), आईएलआर सुनील कुमार परमार, जितेंद्र सिंह मीणा, हृदेश पाठक, हितेंद्र कुमार व्यास, टीएलआई ब्रजराज मीणा, सूचना सहायक प्रकाश सामरिया, वरिष्ठ सहायक सोनू शर्मा तथा कनिष्ठ सहायक महेश कुमार मीणा सहित अध्यापक अशोक कुमार मीणा जैसे अनेक वरिष्ठ पदाधिकारियों ने सक्रिय भूमिका निभाते हुए कर्मचारियों की आवाज बुलंद की।
प्रदर्शन के उपरांत सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की। नेताओं ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कर्मचारी हितों को प्राथमिकता देते हुए 25 सूत्री मांग पत्र का निराकरण नहीं किया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र किया जाएगा। महासंघ ने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाले किसी भी उग्र आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी।

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