फलासिया/उदयपुर। होली पर्व के अवसर पर संवैधानिक फेलो धनराज गरासिया ने समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए प्रेम, सद्भाव और सामाजिक एकता के साथ त्योहार मनाने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का पर्व नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे, बंधुता और सौहार्द का प्रतीक है।

संविधान के आदर्शों और सामाजिक समरसता पर बल

धनराज गरासिया ने अपने संदेश में भारतीय संविधान में निहित बंधुता, समानता और सामाजिक समरसता के मूल्यों को स्मरण करते हुए नागरिकों से अपील की कि वे इन आदर्शों को व्यवहार में उतारते हुए शांतिपूर्ण एवं मर्यादित ढंग से होली मनाएं। उनके अनुसार, "सच्चे अर्थों में त्योहार की खुशी तभी सार्थक है, जब समाज में आपसी प्रेम और विश्वास बना रहे।"

जंगलों में दावानल रोकने और पर्यावरण संरक्षण की अपील

उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों से आग्रह किया कि होली के दौरान जंगलों में दावानल (आग) न लगाएं। इस प्रकार की घटनाओं से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है, वन्यजीवों का जीवन संकट में पड़ता है तथा बहुमूल्य प्राकृतिक संपदा नष्ट होती है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि "प्रकृति संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है और आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है।"

युवाओं की जिम्मेदारी और सुरक्षित उत्सव का संदेश

धनराज गरासिया ने यह भी कहा कि "सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और सौहार्दपूर्ण होली ही संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप सच्चा उत्सव है।" उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे जागरूक नागरिक बनते हुए समाज में सकारात्मक संदेश फैलाएं और त्योहार को उत्साह के साथ-साथ जिम्मेदारी से भी मनाएं।

Pratahkal Newsroom

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