जैसलमेर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलने की कथित साज़िश के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को कड़ा विरोध दर्ज कराया। जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन कर केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोला और महात्मा गांधी के नाम से जुड़ी जनकल्याणकारी योजना की मूल भावना से किसी भी प्रकार के छेड़छाड़ का विरोध किया।

प्रदर्शन से पहले जिला कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेसजनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र सरकार पर गरीब, मजदूर और ग्रामीण तबके के अधिकारों को कमजोर करने के आरोप लगाए गए। बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष अमरदीन फकीर ने कहा कि महात्मा गांधी का नाम केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत की आत्मा, श्रमिकों की पहचान और सामाजिक न्याय का प्रतीक है। ऐसे में मनरेगा जैसी योजना से उनका नाम हटाने का प्रयास आमजन की भावनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है।

बैठक में पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद, पीसीसी महासचिव एवं पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल सहित अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि भाजपा सरकार लगातार गरीबों के अधिकारों पर प्रहार कर रही है और मनरेगा जैसी योजना को कमजोर करने के प्रयास उसी नीति का हिस्सा हैं। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस मुद्दे पर सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष जारी रखेगी।

बैठक के पश्चात कांग्रेस कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां मनरेगा को कमजोर करने और महात्मा गांधी का नाम हटाने के प्रयासों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। कांग्रेस ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह महात्मा गांधी के नाम और मनरेगा योजना की मूल भावना की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी।

इस दौरान पूर्व मंत्री सालेह मोहम्मद, पीसीसी महासचिव एवं पूर्व जिला प्रमुख अंजना मेघवाल, उम्मेद सिंह तंवर, पीसीसी सचिव गोविंद भार्गव, वरिष्ठ नेता राधेश्याम कल्ला, जैसलमेर ब्लॉक अध्यक्ष कुंदन प्रजापत, एनएसयूआई अध्यक्ष मानाराम, सेवादल अध्यक्ष प्रदीप महेचा, महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेखा जोशी, प्रदेश महासचिव युवा कांग्रेस अमीन खान, शंकर माली, विकास व्यास सहित डीसीसी, ब्लॉक कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवादल के अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। प्रदर्शन ने स्पष्ट संकेत दिया कि मनरेगा और महात्मा गांधी के नाम से जुड़ा यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस के केंद्र में बना रहेगा।

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