राजेंद्र शर्मा, बारां।

अंता विधानसभा उपचुनाव राजस्थान का माहौल मंगलवार को बेहद रोचक और रोमांचक रहा। मतदान के दौरान मतदाताओं की चुप्पी और असमंजस ने चुनावी समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है। मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इस बार का मुकाबला किसी एक दल के पक्ष में आसानी से नहीं झुकने वाला। भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय प्रत्याशी तीनों ने मैदान में बराबर की टक्कर बनाए रखी है।

मंगलवार, 11 नवंबर की सुबह जैसे ही मतदान केंद्रों के द्वार खुले, वैसे ही मतदाताओं की लंबी कतारें दिखाई देने लगीं। क्षेत्र के शहरी और ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही मतदान का उत्साह चरम पर था। दिनभर चले मतदान के बाद शाम 6 बजे तक लगभग 80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। निर्वाचन विभाग के अनुसार, 2 लाख 28 हजार 264 पंजीकृत मतदाताओं में से 1 लाख 16 हजार 783 पुरुष और 1 लाख 11 हजार 477 महिला मतदाता हैं। मतदान के दौरान युवा मतदाताओं का उत्साह भी उल्लेखनीय रहा।

अंता क्षेत्र की जनता इस बार अपने अनुभवों और विकास की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर मतदान करती नजर आई। मतदाताओं ने कांग्रेस और भाजपा दोनों के शासनकाल देखे हैं, और इस बार उन्होंने प्रत्याशियों से क्षेत्रीय विकास और कामकाज को आधार बनाते हुए निर्णय लिया है। ग्रामीण इलाकों में जहां एक ओर विकास कार्यों की कमी पर नाराजगी दिखी, वहीं कस्बों में मतदाता संतुलित जवाब देते हुए अपनी पसंद को अंतिम क्षण तक गोपनीय रखते नजर आए।

मुख्य मुकाबला भाजपा के मोरपाल सुमन, कांग्रेस के पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया, और निर्दलीय नरेश मीणा के बीच देखने को मिल रहा है। तीनों प्रत्याशी अपने-अपने स्तर पर मजबूत स्थिति का दावा कर रहे हैं, परंतु वास्तविक तस्वीर 14 नवंबर को मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगी। 15 प्रत्याशी मैदान में हैं, किंतु त्रिकोणीय संघर्ष ने पूरे उपचुनाव को दिलचस्प बना दिया है।

चुनाव के दौरान प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह सतर्क रहा। कुछ मतदान केंद्रों पर मामूली व्यवधानों को प्रशासन ने तत्परता से सुलझाया। जिला निर्वाचन विभाग के अधिकारी लगातार मतदान केंद्रों का दौरा करते रहे और मतदान प्रक्रिया पर कड़ी नजर बनाए रखी। इस बीच, मांगरोल क्षेत्र के साकली गांव में मतदाताओं ने स्थानीय समस्याओं के समाधान न होने से नाराज होकर मतदान का बहिष्कार किया, जहां केवल एक मत ही डाला गया।

कुल मिलाकर, अंता विधानसभा उपचुनाव ने एक बार फिर साबित किया है कि लोकतंत्र का सबसे बड़ा उत्सव मतदाता के निर्णय से ही साकार होता है। अब निगाहें 14 नवंबर की मतगणना पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि जनता ने विकास, नेतृत्व और विश्वास की डगर पर किसे चुना है।

Rajendra Sharma, Baran

Rajendra Sharma, Baran

नाम: राजेंद्र शर्मा

वर्तमान पद: संवाददाता | प्रांतीय प्रचार प्रमुख (भारत तिब्बत सहयोग मंच)

कार्यक्षेत्र: बारां (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीतिक, आपराधिक, समसामयिक, सामाजिक, धार्मिक, पर्यटक स्थल एवं ऐतिहासिक धरोहर

परिचय 

राजेंद्र शर्मा राजस्थान के बारां क्षेत्र के एक अत्यंत वरिष्ठ और अनुभवी पत्रकार हैं। वह वर्तमान में संवाददाता के रूप में कार्य करने के साथ-साथ 'भारत तिब्बत सहयोग मंच' में प्रांतीय प्रचार प्रमुख का दायित्व भी संभाल रहे हैं। राजेंद्र शर्मा मुख्य रूप से राजनीतिक व आपराधिक मामलों, समसामयिक और सामाजिक विषयों सहित क्षेत्र के धार्मिक, पर्यटक स्थलों तथा ऐतिहासिक धरोहरों पर विशेष रूप से रिपोर्टिंग करते हैं।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

  • राजेंद्र शर्मा वर्ष 1994 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय हैं। पिछले तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने देश और राज्य के कई बड़े मीडिया संस्थानों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है:
  • राजस्थान पत्रिका (1992–1994): सहायक संवाददाता के रूप में पत्रकारिता की शुरुआत की।
  • दैनिक भास्कर (1996/97–2000): फाउंडर ब्यूरो चीफ के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली।
  • दैनिक नवज्योति (2000 से): लगभग 9 वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं।
  • दैनिक जननायक: 5 वर्षों तक नियमित कार्य किया।
  • अन्य राष्ट्रीय व क्षेत्रीय समाचार पत्र: उन्होंने 'राष्ट्रदूत', कोटा के साप्ताहिक समाचार पत्र 'शिल्पांगी', तथा 1 वर्ष तक 'जनसत्ता' और 'हिंदुस्तान टाइम्स' में भी कार्य किया है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।

Next Story