जैसलमेर। भारत मुक्ति मोर्चा एवं राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा के आह्वान पर गुरुवार को जैसलमेर जिला मुख्यालय पर बहुजन समाज का व्यापक और उग्र शक्ति प्रदर्शन हुआ, जिसने शहर का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और सरकार के समक्ष स्पष्ट संदेश रखा। देशव्यापी चार चरणों में संचालित आंदोलन के चौथे और अंतिम चरण के तहत आयोजित भारत बंद के दौरान सैकड़ों कार्यकर्ताओं, युवाओं, किसानों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर एकजुटता का प्रदर्शन किया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष वामन मेश्राम एवं चौधरी विकास पटेल के नेतृत्व में संचालित इस आंदोलन के तहत जैसलमेर में निकाली गई रैली में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और सामाजिक न्याय, समान अधिकार तथा भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया।

ओबीसी संयोजक पर्वत सिंह ने अपने संबोधन में केंद्र एवं राज्य सरकारों की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बहुजन समाज, ओबीसी वर्ग, युवाओं, विद्यार्थियों और किसानों के हितों की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और अधिक उग्र तथा व्यापक रूप दिया जाएगा।

वक्ताओं ने बताया कि आंदोलन का पहला चरण 6 मार्च को ज्ञापन सौंपकर प्रारंभ हुआ था, जिसके बाद 13 मार्च को दूसरे चरण में धरना-प्रदर्शन आयोजित किए गए। तीसरे चरण के तहत देशभर के 725 जिला मुख्यालयों पर रैलियां निकाली गईं, जिनमें 23 मार्च को जैसलमेर सहित कई जिलों में विशाल प्रदर्शन हुए। इसी क्रम में चौथे चरण के रूप में 23 अप्रैल को देशव्यापी भारत बंद का आयोजन किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए भारत मुक्ति मोर्चा राजस्थान के प्रदेश प्रभारी शिवदानाराम राठौड़ ने जाति आधारित जनगणना में ओबीसी कॉलम शामिल नहीं किए जाने को करोड़ों लोगों के साथ अन्याय बताया और ओबीसी की वास्तविक जनसंख्या के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग उठाई। उन्होंने 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता के निर्णय को वापस लेने की मांग भी प्रमुखता से रखी।

सभा में यूजीसी से संबंधित सख्त कानून लागू करने की सिफारिशों को युवाओं के भविष्य के लिए लाभकारी बताते हुए उन्हें शीघ्र लागू करने की मांग की गई। वक्ताओं ने शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया।

इसके अतिरिक्त चुनाव प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी जोर-शोर से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी सभी मांगें संविधान और सामाजिक न्याय की मूल भावना के अनुरूप हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक तथा तीव्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

इस दौरान जिलाध्यक्ष बजरंगाराम परिहार, संयोजक मालाराम हड्डा, महेंद्र बौद्ध प्रदेश प्रभारी युवा मोर्चा, भारतीय आदिवासी एकता परिषद के जिला संयोजक प्रेमाराम भील, ठाकुर राम जयपाल (ब्लॉक अध्यक्ष, पोकरण), रायधनराम (पूर्व प्रधानाचार्य), अधिवक्ता गिरधारी राम राठौड़, कोजराज कोहली प्रदेश सदस्य, रामचन्द्र लीलड़, किशनाराम पंवार सेवानिवृत्त अध्यापक, रमेश कुमार गाड़ी, मूलाराम लीलड़, प्रहलादराम पंवार, भारतीय बेरोजगार मोर्चा के जिला संयोजक गिरधारीलाल कोहली, बागाराम राठौड़, ठाकुरराम पंवार, तुलछाराम पंवार, हेमाराम, गुमानाराम पंवार, प्रेमाराम गाड़ी, शंकराराम, हमीराराम साधना, लक्ष्मणराम, विशाल बालों, किशन बालोच शैतान सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समर्थक उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau

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