ब्यावर: ओबीसी आयोग की जिला स्तरीय जन सुनवाई में कीर समाज ने अपनी समस्याओं और मांगों को रखा सामने
ब्यावर में ओबीसी आयोग की जिला स्तरीय जन सुनवाई में कीर समाज ने अपनी सामाजिक और राजनीतिक समस्याओं को रखकर अत्यंत पिछड़ी जाति में शामिल करने, छात्रावास निर्माण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की मांग की। आयोग अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

ब्यावर। राजस्थान ओबीसी आयोग (राजनैतिक) की जिला स्तरीय जन सुनवाई में आज ब्यावर जिले के कीर समाज ने अपनी सामाजिक और राजनीतिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए एक विस्तृत मांग पत्र आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया। जिला कलेक्टर सभागार में आयोजित इस सुनवाई में कीर समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी आपबीती साझा करते हुए समाज के उत्थान और आरक्षण सहित विभिन्न मांगों की आवश्यकता पर जोर दिया।
कीर समाज के प्रतिनिधि और भाजपा नेता धर्मवीर कीर, क़ीर समाज विकास समिति राजस्थान के अध्यक्ष, और सहसचिव अध्यापक हनुमान कीर, प्रकाश क़ीर पिपलिया, महेंद्र क़ीर, प्रकाश क़ीर बर सहित समाज के अन्य सदस्य मौजूद रहे। ज्ञापन में बताया गया कि कीर समाज एक पौराणिक जलवांशी जाति है, जिसे रामायण काल से वर्तमान तक केवट, कहार, कीर व कश्यप नामों से जाना जाता रहा है। वर्तमान में यह समाज अत्यंत पिछड़ा हुआ है और राजस्थान में इसकी आबादी लगभग 15 लाख है।
मांग पत्र में कीर समाज ने अत्यंत पिछड़ी जाति (MBC) में शामिल करने, केवट कल्याण बोर्ड में राजनीतिक नियुक्तियां देने, समाज के लिए छात्रावास निर्माण, बोर्ड, आयोग, निगम इत्यादि में नियुक्तियों की सुविधा, विश्वविद्यालय में अनुसंधान और छात्रवृत्ति, परंपरागत व्यवसायों के लिए ऋण व अनुदान, माँ पूरी बाई और पनोरमा निर्माण, और निकाय व निगमों में प्रतिनिधित्व देने की मांग की। साथ ही, समाज को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की भी अनुशंसा की गई।
धर्मवीर कीर ने बताया कि पूरे राजस्थान में कीर समाज का एक भी छात्रावास नहीं है और राजनीतिक प्रतिनिधित्व पूर्णतः शून्य है। राजनीतिक पार्टियों ने आज तक किसी भी रूप में समाज को महत्वपूर्ण राजनीतिक नियुक्तियां या टिकट नहीं दिया। उन्होंने मुख्य मांग के रूप में MBC में आरक्षण देने और जयपुर में छात्रावास आवंटित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि समाज का शिक्षा और सामाजिक विकास सुनिश्चित हो सके।
ओबीसी आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने कीर समाज की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि आयोग के माध्यम से सरकार तक इन मुद्दों को पहुंचाया जाएगा। यह सुनवाई ब्यावर जिले में कीर समाज की लंबे समय से प्रतीक्षित आवाज़ को सामने लाने और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

Pratahkal Bureau
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