ब्यावर (झूंठा): धन नश्वर है पर धर्म शाश्वत, आत्मा के कल्याण हेतु धर्म की कमाई अनिवार्य - आचार्य महाश्रमण
ब्यावर के झूंठा गांव में आचार्यश्री महाश्रमणजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए धन के साथ धर्म की कमाई को आवश्यक बताया। उन्होंने राग-द्वेष के त्याग और आत्ममंथन का संदेश देते हुए श्रद्धालुओं को सामायिक और तप का संकल्प दिलाया। चंडावल से विहार कर पहुंचे आचार्यश्री का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया।

ब्यावर (झूंठा)। भौतिकता की अंधी दौड़ में उलझे आधुनिक समाज को जीवन का वास्तविक सार समझाते हुए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अनुशास्ता और अहिंसा यात्रा के प्रणेता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने एक गंभीर आध्यात्मिक चेतना का शंखनाद किया है। ब्यावर जिले के झूंठा गांव में आयोजित मंगल प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने स्पष्ट किया कि सांसारिक जीवन के निर्वाह के लिए धन का अर्जन भले ही आवश्यक हो, किंतु आत्मा की अनंत यात्रा में केवल धर्म की पूंजी ही साथ जाती है। उन्होंने मानवता को संदेश दिया कि जिस प्रकार मनुष्य अपने धन का पाई-पाई का हिसाब रखता है, उसी प्रकार उसे अपने संचित पुण्य और धर्म का भी लेखा-जोखा रखना चाहिए।
अहिंसा और संयम का संदेश लेकर निरंतर गतिमान आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ बुधवार को चंडावल से विहार कर झूंठा पहुंचे। मार्ग में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा और विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने पलक-पांवड़े बिछाकर अपने आराध्य का स्वागत किया। दोपहर लगभग एक बजे जैसे ही आचार्यश्री का श्री पार्श्वनाथ चिंतामणि मंदिर परिसर में पदार्पण हुआ, पूरा वातावरण 'जय-जय ज्योतिचरण' के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा। जैन संघ और स्थानीय ग्रामीणों ने अपार उत्साह और भक्तिभाव के साथ आचार्य प्रवर की अगवानी की।
अपने ओजस्वी मंगल प्रवचन में आचार्यश्री ने कर्मों के सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा कि राग और द्वेष ही समस्त पापों के मूल बीज हैं। इन्हीं विकारों के वशीभूत होकर व्यक्ति अशुभ कर्मों का बंधन करता है, जो जन्म-जन्मांतर तक कष्टों का कारण बनते हैं। उन्होंने वीतराग अवस्था को परम लक्ष्य बताते हुए कहा कि सामान्य व्यक्ति को कम से कम अपने आचरण के प्रति सजग रहना चाहिए। वर्ष के अंतिम दिन पर आत्ममंथन की प्रेरणा देते हुए उन्होंने आह्वान किया कि यदि अनजाने में कोई पाप हुआ हो, तो प्रायश्चित के माध्यम से आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाना चाहिए, क्योंकि आत्मा अमर है और उसका कल्याण केवल सजग प्रयासों से ही संभव है।
आचार्यश्री ने उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिक जीवन शैली अपनाने की प्रेरणा देते हुए प्रतिदिन सामायिक, स्वाध्याय, ध्यान और सेवा को दिनचर्या का हिस्सा बनाने का संकल्प दिलाया। उन्होंने मास में कम से कम एक उपवास करने पर भी बल दिया, ताकि शरीर और मन दोनों की शुद्धि हो सके। कार्यक्रम का आरंभ जैन संघ के अध्यक्ष पारसमल गादिया के स्वागत उद्बोधन से हुआ। वहीं, मुकनचंद बोहरा एवं अन्य श्रद्धालुओं ने भक्ति गीतों की मधुर प्रस्तुतियां दीं, जिससे समूचा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।
इस महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में समाज के गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में जैन संघ अध्यक्ष पारसमल गादिया के साथ संघ मंत्री नवरत्न गादिया, कोषाध्यक्ष अशोक चोपड़ा, पूर्व उप जिला प्रमुख गणपत राज बोहरा, शांतिलाल चोपड़ा, संपत राज चोपड़ा, मुकन राज बोहरा, भागचंद जैन, विनोद बोहरा, कमलेश बोहरा, अजीत मेहता, करण जैन, अजय बोहरा, सुनील बोहरा, अमित बोहरा, यश बोहरा, गणपत राज चोपड़ा एवं प्रकाश गादिया सहित भारी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने क्षेत्र में सामाजिक समरसता और धार्मिक चेतना का एक नया अध्याय भी लिख दिया।

Pratahkal Bureau
प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।
