ब्यावर। राजस्थान के प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ की जिला शाखा ब्यावर की एक महत्वपूर्ण बैठक जिलाध्यक्ष जवरीलाल प्रजापत की अध्यक्षता में पटवार विश्रांति भवन में संपन्न हुई। यह बैठक केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने आने वाले समय में राज्य सरकार के समक्ष कर्मचारियों की एकजुटता और शक्ति प्रदर्शन का स्पष्ट संकेत दे दिया है।

बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु आगामी 12 जनवरी 2026 को राजधानी जयपुर में आयोजित होने वाली विशाल महारैली रही। इस महारैली को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार करते हुए जिलाध्यक्ष ने सभी घटक दलों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह रैली केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के सम्मान और उनके अधिकारों की हुंकार होगी। बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया कि प्रत्येक घटक दल के प्रतिनिधि इस महारैली में अपनी शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे, ताकि ब्यावर जिले का प्रतिनिधित्व राजधानी में प्रभावी ढंग से दिखाई दे।

इस दौरान राजस्थान पटवार संघ जिला शाखा ब्यावर ने एक अत्यंत गंभीर और तकनीकी मुद्दा सदन के पटल पर रखा। पटवार संघ के प्रतिनिधियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि तहसीलदार पद पर मंत्रालयी कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए कोटा निर्धारण की मांग लंबे समय से लंबित है। निरंतर प्रयासों के बावजूद सरकार द्वारा इस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है। इस पर गहन विमर्श के बाद महासंघ ने निर्णय लिया कि पटवारियों की इस जायज मांग को अखिल राजस्थान राज्य संयुक्त महासंघ के मुख्य मांग पत्र में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा, जिससे इस मुद्दे को राज्य स्तर पर मजबूती मिल सके।

संगठन की इस शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए हुई बैठक में जिले के कई प्रमुख चेहरों ने शिरकत की। इनमें राजस्थान पंचायत राज माध्यमिक शिक्षक संघ ब्यावर के जिला सभाध्यक्ष बदाराम अणकिय, जिला मंत्री अर्जुन कुमावत और पूर्ण कुमार लोहार शामिल रहे। साथ ही राजस्थान पटवार संघ के जिलाध्यक्ष मूलाराम भाटी, सुनील डेटानी (कानूनगो संघ ब्यावर), ग्राम विकास अधिकारी संघ रायपुर से नरेंद्र कटारिया, पटवार संघ के कोषाध्यक्ष अजीत सिंह चौधरी, अभिषेक मीणा (पटवारी) और जवाजा संयोजक सुरेश जेवलिया जैसे प्रबुद्ध पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर आगामी आंदोलन को धार देने का संकल्प लिया। ब्यावर की इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारी अब अपनी मांगों को लेकर किसी भी प्रकार के समझौते के मूड में नहीं हैं और जयपुर की महारैली प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकती है।

Pratahkal Newsroom

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