ब्यावर: श्री विश्वकर्मा जयंती पर सार्वजनिक अवकाश की गूँज, जोगीड़ समाज ने रायपुर उपखंड अधिकारी को सौंपा ज्ञापन
ब्यावर जिले के रायपुर में जोगीड़ समाज ने मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी सुमित्रा बिश्नोई को ज्ञापन सौंपकर श्री विश्वकर्मा जयंती पर राजस्थान में सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की पुरजोर मांग की है। जानिए कारीगरों और शिल्पकारों के आराध्य देव के सम्मान में समाज ने क्यों उठाई यह मांग और क्या है पूरा मामला।

ब्यावर/रायपुर। राजस्थान की शिल्प और तकनीकी विरासत के आराध्य देव भगवान श्री विश्वकर्मा की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में ब्यावर जिले के रायपुर उपखंड क्षेत्र में जोगीड़ समाज ने अपनी एकजुटता का परिचय देते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज के प्रतिनिधियों ने राजस्थान सरकार तक अपनी आवाज पहुँचाने के उद्देश्य से रायपुर उपखंड अधिकारी सुमित्रा बिश्नोई को मुख्यमंत्री के नाम एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से माघ शुक्ल त्रयोदशी को राजकीय अवकाश घोषित करने की पुरजोर पैरवी की गई है।
क्षेत्रीय जोगीड़ समाज तहसील रायपुर के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया। ज्ञापन में इस बात पर गहरा प्रकाश डाला गया कि भगवान श्री विश्वकर्मा न केवल एक समाज विशेष के, बल्कि समस्त कारीगरों, शिल्पकारों, श्रमिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और औद्योगिक जगत से जुड़े करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणापुंज और आराध्य हैं। जोगीड़ समाज का तर्क है कि इस विशेष दिवस पर सार्वजनिक अवकाश होने से समाज के लाखों मेहनतकश लोग बिना किसी व्यवधान के अपने आराध्य की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सकेंगे और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ पाएंगे।
उपखंड अधिकारी सुमित्रा बिश्नोई को ज्ञापन सौंपते समय जोगीड़ समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी और कई प्रबुद्ध समाजजन उपस्थित रहे। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि विश्वकर्मा जयंती को राज्य स्तर पर मान्यता देना और इसे अवकाश की श्रेणी में लाना समाज की एक पुरानी और न्यायसंगत मांग है। यह केवल एक छुट्टी की मांग नहीं है, बल्कि उन हाथों के प्रति सम्मान व्यक्त करने का जरिया है जो राष्ट्र निर्माण में अपनी शिल्पकला और श्रम से योगदान देते हैं।
ज्ञापन के माध्यम से समाज ने प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री से इस विषय पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय लेने की भावुक अपील की है। समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो यह प्रदेश के लाखों कारीगरों और तकनीकी वर्ग के प्रति एक बड़ा सम्मान होगा। अब सभी की निगाहें सरकार के आगामी रुख पर टिकी हैं कि क्या इस वर्ष भगवान विश्वकर्मा की जयंती पर राजस्थान में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की जाती है या नहीं।

Pratahkal Bureau
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