कोटा। दीपावली के उल्लास के बीच जहां चारों ओर आतिशबाज़ी की चमक थी, वहीं इंद्र विहार स्थित सीमंधर जिनालय में इस बार कुछ अलग ही दृश्य देखने को मिला। कुंदकुंद पाठशाला द्वारा रविवार को आयोजित सामूहिक पूजन और दीपावली समारोह में बच्चों ने पटाखों से दूरी बनाकर अहिंसा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर के सिद्धांतों की वंदना से हुई। इसके बाद बच्चों ने सामूहिक रूप से दीप जलाए और ‘अहिंसा का दीप’ प्रज्वलित करते हुए पर्यावरण-अनुकूल दीपावली मनाने का संकल्प लिया। पाठशाला की इस अनूठी पहल के तहत उन बच्चों को सम्मानित और पुरस्कृत किया गया जिन्होंने पूरे वर्ष पटाखे नहीं चलाने और अहिंसा के मार्ग पर चलने का व्रत निभाया।

समारोह में अभिलाष शास्त्री, मेघा पटौदी, महेंद्र जैन, गायका हरसौरा और चंद्र प्रकाश हरसौरा सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे। अतिथियों ने बच्चों की इस जागरूक पहल की सराहना करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी में यदि ऐसे संस्कार रोपित होते हैं तो समाज में शांति और सद्भाव के दीप अवश्य जलेंगे।

पाठशाला निर्देशिका सीमा हरसौरा ने सभी अतिथियों और समाजजनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन केवल दीपावली मनाने का नहीं, बल्कि मूल्यों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने बच्चों की संवेदनशीलता और उनके अहिंसामय दृष्टिकोण को “समाज के उज्जवल भविष्य की नींव” बताया।

सीमंधर जिनालय में हुई इस सांस्कृतिक व आध्यात्मिक पहल ने यह संदेश दिया कि दीपों का त्योहार केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि मन की शांति, करुणा और सद्भाव का भी प्रतीक है। कुंदकुंद पाठशाला की इस पहल ने समाज में अहिंसा, पर्यावरण-अनुकूलता और संस्कारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

Pratahkal Bureau

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