ब्यावर (प्रातःकाल संवाददाता)। मातृ-पितृ भक्त श्रवण कुमार की अपने बुजुर्ग व नेत्रहीन माता-पिता के प्रति अप्रतिम प्रेम एवं अटूट सेवा भक्ति संसार में अजर-अमर है। श्रवण कुमार की मानिंद ही जिले की सीमा से सटे रोहिसा (नागौर) निवासी अशोक कुमार (बंटी) टाक (35) ने भी अपने वयोवृद्ध पिता हीरालाल टाक (88) की सेवा-सुश्रुषा को ही अपना धर्म मान लिया। उन्हें स्नान कराना, कपड़ों की धुलाई करना, भोजन कराना, आवश्यक होने पर अस्पताल में चिकित्सीय परीक्षण कराना ओर दवा देना इत्यादि कार्य को उसने अपना नित्य कर्म बना लिया।

पिता के स्वास्थ्य के प्रति समर्पण

जून 2023 में पिता को श्वसन संबंधी तकलीफ होने पर अजमेर के एक निजी अस्पताल में उनके हृदय की शल्य क्रिया कराई। इसके बाद उनका स्वास्थ्य उत्तम हो गया। दुर्भाग्य से गत वर्ष 12 फरवरी को अजमेर में उनके एक पैर में फ्रेक्चर होने से उनका स्वतः चलना फिरना बंद सा हो गया। जिससे उनकी सेहत धीरे-धीरे खराब रहने लगी। गत 4 मार्च को उसके पिताश्री का दुखद देहांत हो गया। आखिरी सांस तक अशोक साये की तरह अपने पिता के साथ ही रहा ओर सदैव एक आज्ञाकारी व आदर्श पुत्र का फर्ज ईमानदारी से निभाता रहा।

मां ने दी श्रवण कुमार की संज्ञा

असाधारण व दीर्घ सेवा कार्य के चलते अशोक की माता श्रीमती शांति देवी ने उसे "श्रवण कुमार" की संज्ञा दी है। अशोक अपने माता-पिता की 6वीं संतान है। गौरतलब है कि स्कूली शिक्षा के समय बस से सफर के दौरान अशोक स्वयं एक भयानक विद्युत दुर्घटना में बेसुध व जख्मी हो गया था। लंबी अवधि तक चले उपचार के बाद वह पूर्णतः स्वस्थ हो पाया था और आज उसने पितृ सेवा की मिसाल पेश की है।

Pratahkal Bureau

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