कोटा।

मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए कोटा के अनुपम जैन ने शादी समारोह के बीच से उठकर एक डेंगू पीड़िता के जीवन को बचाने के लिए अपनी एसडीपी (Single Donor Platelet) डोनेट की। यह प्रेरणादायक घटना न केवल इंसानियत का सर्वोत्तम उदाहरण है, बल्कि समाज में रक्तदान के महत्व को भी रेखांकित करती है।

टीम जीवनदाता के संयोजक और लायंस क्लब कोटा टेक्नो के निदेशक भुवनेश गुप्ता ने बताया कि सोगरिया निवासी मोनिका गोड डेंगू से गंभीर रूप से पीड़ित थीं। उनकी प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार से भी कम रह गई थी, जिससे परिजन बेहद चिंतित थे। ऐसे में उन्होंने सहायता के लिए टीम जीवनदाता से संपर्क किया। टीम ने तत्काल व्यवस्था करते हुए ओ पॉजीटिव एसडीपी की आवश्यकता की जानकारी दी।

गुप्ता ने बताया कि जब उन्होंने अनुपम जैन से संपर्क किया, उस समय वे एक शादी समारोह में शामिल थे। पहले तो वे थोड़े असमंजस में थे, लेकिन जब उन्हें बताया गया कि एक मरीज की जिंदगी उनके रक्तदान पर निर्भर है, तो उन्होंने बिना देर किए समारोह छोड़ दिया। सीधे तलवंडी स्थित ब्लड सेंटर पहुंचे और ओ पॉजीटिव एसडीपी डोनेट कर मोनिका की जान बचाई।

अनुपम जैन पहले भी कई बार रक्तदान कर चुके हैं — यह उनका सातवां एसडीपी डोनेशन और पच्चीसवां ब्लड डोनेशन था। वे अपने पिता इन्द्रसेन जैन और पत्नी लता जैन से प्रेरणा लेकर सामाजिक कार्यों में निरंतर सक्रिय रहते हैं।

भुवनेश गुप्ता ने कहा कि टीम जीवनदाता अब तक सैकड़ों जरूरतमंद मरीजों तक समय पर एसडीपी और रक्त पहुंचा चुकी है। टीम का यह प्रयास न केवल लोगों को नया जीवन दे रहा है, बल्कि समाज में मानवता की भावना को भी मजबूत बना रहा है।

यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है — और जब कोई अपनी सुविधाओं से ऊपर उठकर किसी की जान बचाने के लिए आगे आता है, तो वह सच्चे अर्थों में जीवनदाता कहलाता है।

Pratahkal Bureau

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