मध्यप्रदेश के आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ ब्राह्मण समाज में आक्रोश, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और निलंबन की मांग
मध्यप्रदेश के आईएएस संतोष वर्मा के विवादित बयान के खिलाफ ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश। बारां जिले में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन, गिरफ्तारी और निलंबन की मांग। ज्ञापन गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के राज्यपाल को सौंपा गया।

बारां, 27 नवम्बर: मध्यप्रदेश के भारतीय प्रशासनिक अधिकारी (आईएएस) संतोष वर्मा के विवादित बयान ने ब्राह्मण समाज में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट में ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने व्यापक प्रदर्शन किया और संतोष वर्मा के खिलाफ तत्काल प्रकरण दर्ज कर गिरफ्तारी तथा निलंबन की मांग की।
ब्राह्मण समाज का आरोप है कि 23 नवम्बर 2025 को अजाक्स की बैठक के दौरान संतोष वर्मा ने अपने भाषण में ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। उनके कथन के अनुसार, “जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनाता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।” इस बयान को समाज की भावनाओं को आहत करने वाला और विभिन्न समाजों के बीच विभाजन पैदा करने वाला बताया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ नेताओं ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा, जिसमें देश के गृहमंत्री अमित शाह, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के नाम भी संदर्भित किया गया। ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि इस मामले में शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो समूचा ब्राह्मण समाज सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा।
ज्ञापन देने वालों में विप्र फाउंडेशन के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेंद्र शर्मा, ब्राह्मण कल्याण परिषद के जिला संयोजक भगवान शर्मा, जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, शहर अध्यक्ष किशन शर्मा, सनाढ्य ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, आदिगौड ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष गिरिराज शर्मा सहित कई गणमान्य नेता शामिल थे। इसके अतिरिक्त बारां जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ब्राह्मण समाज ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा समाज में जातिगत विभाजन की मानसिकता फैलाना गंभीर मामला है और इसके लिए तुरंत उचित दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। अधिकारियों के पद पर रहते हुए संतोष वर्मा के कथन को समाज में द्वेष और असहमति उत्पन्न करने वाला करार दिया गया।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और समाजिक संगठनों के बीच संवेदनशीलता को उजागर किया है। ब्राह्मण समाज की मांगों और चेतावनियों के मद्देनजर अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य प्रशासन किस प्रकार शीघ्र और प्रभावी कदम उठाता है।

Pratahkal Bureau
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