तपोभूमि प्रणेता आचार्य प्रज्ञासागर जी का आज दादाबाड़ी नसियांजी में मंगल विहार “सम्यक दृष्टि ही आत्मकल्याण का मार्ग” — आचार्य प्रज्ञासागर “पुण्य–पाप के बंधनों से मुक्ति ही सच्चा मोक्ष” — आचार्य प्रज्ञासागर
कोटा में तपोभूमि प्रणेता आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज ससंघ का मंगल विहार तलवंडी जैन मंदिर से जवाहर नगर होते हुए नसियांजी दादाबाड़ी तक संपन्न हुआ। प्रवचनों में उन्होंने सम्यक दृष्टि, पुण्य–पाप और मोक्ष के सिद्धांतों पर गहन प्रकाश डाला, जिससे पूरा वातावरण धर्ममय बन उठा।

कोटा। आध्यात्मिकता और तप की भूमि कोटा आज पुनः धर्ममय हो उठी, जब तपोभूमि प्रणेता एवं पर्यावरण संरक्षक आचार्य श्री 108 प्रज्ञासागर जी मुनिराज ससंघ का तलवंडी जैन मंदिर से दिगंबर जैन पंच बालयती मंदिर, जवाहर नगर के लिए मंगल विहार संपन्न हुआ। विहार के दौरान श्रद्धालुओं की अपार भीड़ ने अपने आराध्य का दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया और वातावरण “जय गुरुदेव” के मंगल घोषों से गुंजायमान हो उठा।
पाद प्रक्षालन का सौभाग्य सोहनलाल–नितेश कुमार बड़जात्या परिवार को प्राप्त हुआ, वहीं आहार दान का पुण्य विनय शाह परिवार ने अर्जित किया। आचार्य श्री के प्रवचन, आरती एवं आनंद यात्रा के दौरान समाज के गणमान्य सदस्य और बड़ी संख्या में उपस्थित श्रावक–श्राविकाओं ने धर्म–अनुभूति का पावन अनुभव किया।
इस अवसर पर सकल दिगंबर जैन समाज के संरक्षक राजमल पाटोदी, अध्यक्ष प्रकाश बज, कार्याध्यक्ष जे.के. जैन, गुरु आस्था परिवार के चेयरमैन यतीश जैन (खेडा वाले), अध्यक्ष लोकेश जैन (सीसवाली), जवाहर नगर जैन समाज के अध्यक्ष सोहनलाल बड़जात्या, महामंत्री महावीर पाटोदी, कार्यकारिणी सदस्य शांतिलाल काला, अरुण, सुरेंद्र गोधा, विनय शाह, कपिल आगम सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अपने प्रवचन में आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी मुनिराज ने पुण्य और पाप की प्रकृति पर गहन प्रकाश डालते हुए कहा कि “शुभ और अशुभ कर्म दोनों ही आत्मा को बंधन में रखते हैं। जैसे सोने और लोहे की बेड़ियाँ भले ही भिन्न प्रतीत हों, परंतु दोनों ही बंधन हैं। पाप सदा त्याज्य है, जबकि पुण्य मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।”
उन्होंने आगे कहा कि “जीवन में सम्यक दृष्टि प्राप्त करने वाला जीव सदैव आत्मकल्याण की दिशा में अग्रसर रहता है। सफलता के लिए पुरुषार्थ आवश्यक है — जब व्यक्ति सम्यक दर्शन का ‘वर्ल्ड कप’ अपने जीवन में थाम लेता है, तब उसका मोक्ष निश्चित हो जाता है।”
आचार्य श्री ने मिथ्यात्व के त्याग और सम्यक दृष्टि के अंगीकरण का आह्वान करते हुए कहा कि सही जीवन दृष्टिकोण अपनाने से ही आत्मा के कल्याण का मार्ग खुलता है। उन्होंने उपस्थित श्रावकों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन को आत्म–सुधार और आध्यात्मिक जागृति के मार्ग पर समर्पित करें।
गुरु आस्था परिवार के चेयरमैन यतीश जैन खेडावाला ने जानकारी दी कि गुरुवार, 6 नवम्बर को आचार्य श्री प्रज्ञासागर जी मुनिराज ससंघ पंच बालयती मंदिर, जवाहर नगर से विहार कर प्रातः 8 बजे श्री दिगंबर जैन मंदिर, नसियांजी दादाबाड़ी में मंगल प्रवेश करेंगे। इस अवसर पर नगर भर में धार्मिक उल्लास और श्रद्धा का विशेष वातावरण रहेगा।
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Pratahkal Bureau
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