सड़क सुरक्षा पर कड़ा रुख: बालवाहिनियों में बच्चों के सुरक्षित सफर के लिए जिले में व्यापक रणनीति
बारां जिले में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए बालवाहिनियों में सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए जिला सड़क सुरक्षा समिति और प्रशासन ने व्यापक रणनीति बनाई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं के निवारण, वाहन मानक, चालक दक्षता और निगरानी उपायों पर चर्चा की गई।

बारां। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिले में सड़क हादसों की रोकथाम और बालवाहिनियों में सुरक्षित सफर सुनिश्चित करने के लिए गुरुवार को मिनी सचिवालय सभागार में महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों में जिला सड़क सुरक्षा समिति और बालवाहिनी संचालकों ने भाग लिया, जिसमें सड़क दुर्घटनाओं के कारणों, सुरक्षा मानकों और बचाव उपायों पर गंभीर चर्चा हुई।
बैठक में जिला पुलिस अधीक्षक अभिषेक अंदासु ने निजी विद्यालय संचालकों को निर्देश दिए कि बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहन पूरी सतर्कता और नियोजित व्यवस्था के तहत संचालित किए जाएँ। उन्होंने कहा कि बालवाहिनियों की फिटनेस के साथ-साथ चालकों और परिचालकों की दक्षता और चरित्र पर विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी प्रकार की ओवरलोडिंग या सुरक्षा मानकों की अनदेखी गंभीर परिणाम ला सकती है। डीएसपी ने स्पष्ट किया कि बच्चों का जीवन अनमोल है और उनकी सुरक्षा हर स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अभिषेक अंदासु ने राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर हो रही दुर्घटनाओं पर गंभीरता दिखाते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित करने, उचित साइनबोर्ड लगाने, आवारा मवेशियों और अतिक्रमण को नियंत्रित करने, सभी कटों पर रब्बर स्ट्रिप्स लगाने और भारी वाहनों के लिए निर्धारित लेन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हाइवे पर वाहनों की अवैध पार्किंग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात भी कही।
एडीएम भंवरलाल जनागल ने कहा कि सभी विद्यालय बालवाहिनियों का बेहतर रखरखाव करें और चालकों व परिचालकों की पूरी जानकारी रखें। बच्चों को सुरक्षित रूप से वाहन में चढ़ाने और उतारने का दायित्व चालक और परिचालक दोनों पर होगा।
जिला परिवहन अधिकारी कल्पना शर्मा ने बताया कि जिले में संचालित सभी बालवाहिनियों का रंग सुनहरा पीला रखा जाए और वाहन पर स्पष्ट रूप से "स्कूल बस" और "बालवाहिनी" अंकित हो। ऑटो रिक्शा पर "ऑन स्कूल ड्यूटी" लिखा जाए। वाहनों पर स्कूल का नाम, फोन नंबर और हेल्पलाइन नंबर का स्टीकर अनिवार्य होगा। सभी बालवाहिनियों में GPS लगाकर निगरानी की जाएगी और वाहन संबंधित सभी दस्तावेज पूर्ण रूप से दुरुस्त रखे जाएँगे। उन्होंने यह भी कहा कि नशे की स्थिति में चालक या परिचालक को नहीं रखा जाएगा और चालक की नेत्र जांच समय पर कराई जाएगी।
बैठक में जिले में सड़क दुर्घटनाओं के कारणों और उनके निवारण पर भी विचार किया गया। एनएचएआई और पीडब्ल्यूडी सहित अन्य विभागों के अधिकारी और जिले के विद्यालय संचालक उपस्थित थे। यह बैठक जिले में बच्चों की सुरक्षा और सड़कों पर सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

Pratahkal Bureau
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