जैसलमेर। विश्व ध्यान दिवस के पावन अवसर पर मरुधरा की धरती जैसलमेर में अध्यात्म और चेतना का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला, जब अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, जोधपुर के तत्वावधान में गुरुदेव रामलालजी सियाग सिद्धयोग शक्तिपात दीक्षा के अंतर्गत विशाल निःशुल्क सिद्धयोग ध्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल ध्यान और योग के प्रति बढ़ती जन-जागरूकता का सशक्त उदाहरण बना, बल्कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति समाज को एक नई दिशा देने वाला क्षण भी सिद्ध हुआ।

इस कार्यक्रम की पूर्व तैयारी के तहत बीते कई दिनों से जैसलमेर तथा आसपास के क्षेत्रों में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों, महाविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों, कारागारों और डाइट केंद्रों में ध्यान योग कार्यक्रम आयोजित कर आमजन को सिद्धयोग के महत्व से परिचित कराया गया। इसी क्रम में मुख्य कार्यक्रम रविवार, 21 दिसंबर 2025 को सायं 4 बजे अमर शहीद सागरमल गोपा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर, हनुमान चौराहा, जैसलमेर में सम्पन्न हुआ।

मुख्य कार्यक्रम में गुरुदेव सियाग सिद्धयोग से जुड़े साधक राजस्थान सहित विभिन्न जिलों और राज्यों से जैसलमेर पहुंचे। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधकों और विद्यार्थियों ने एकत्र होकर सामूहिक ध्यान योग का अनुभव प्राप्त किया। पूरा वातावरण साधना, शांति और सकारात्मक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सिद्धयोग ध्यान की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि गुरु सियाग सिद्धयोग के माध्यम से शारीरिक एवं मानसिक रोगों से राहत, तनाव में कमी तथा विभिन्न प्रकार के नशों से सहज रूप में मुक्ति संभव है। उन्होंने बताया कि नियमित ध्यान योग से विद्यार्थियों की स्मरण शक्ति, एकाग्रता और सर्वांगीण विकास में उल्लेखनीय सुधार होता है। आधुनिक जीवन की तेज़ रफ्तार और मानसिक दबावों के बीच यह ध्यान शिविर आत्मिक शांति और आत्मचेतना की ओर लौटने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा।

वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि योग केवल शरीर को साधने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि जीवन को संतुलन और अनुशासन देने की कला है, जबकि ध्यान वह मौन है, जिसमें मनुष्य स्वयं की अंतरात्मा से साक्षात्कार करता है। कार्यक्रम के अंत में योग शिविर प्रभारी ने सभी गुरुजनों, साधकों, आयोजकों और उपस्थित जनसमूह के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से यह आयोजन अत्यंत दिव्य, अनुशासित और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

विश्व ध्यान दिवस के अवसर पर जैसलमेर में आयोजित यह सिद्धयोग कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक चेतना का संदेश देने वाला रहा, बल्कि यह सिद्ध करता है कि ध्यान और योग आज के समय में स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन की आवश्यकता बन चुके हैं।

Pratahkal Bureau

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