धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक गौरव का संगम : चन्द्रभागा कार्तिक मेला
चन्द्रभागा का कार्तिक मेला धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपरा और व्यापारिक उत्सव का अनोखा संगम है। झालरापाटन में कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाला यह मेला भगवान शिव की आराधना, चन्द्रभागा नदी में स्नान और पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध है, जो आज भी राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर बना हुआ है।

झालरापाटन, राजस्थान।
मालवा और हाड़ौती अंचल की सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाला चन्द्रभागा का कार्तिक मेला न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध परंपरा रखता है। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर चन्द्रभागा नदी के तट पर लगने वाला यह मेला सदियों से श्रद्धालुओं और व्यापारियों के आकर्षण का केंद्र रहा है।
प्राचीन मान्यताओं के अनुसार यह मेला चन्द्रभागा जैसी मोक्षदायिनी नदी में कार्तिक स्नान की परंपरा से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के वंशज राजा चन्द्रसेन कुष्ठरोग से पीड़ित होकर इसी पवित्र स्थल पर आए थे। उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या की, जिसके परिणामस्वरूप कार्तिक पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्रमा की चांदनी में इस नदी का प्रकट होना माना जाता है। जब चन्द्रसेन ने इस नदी में स्नान किया, तो वे रोगमुक्त हुए। उसी के बाद उन्होंने इस पवित्र धारा को ‘चन्द्रभागा’ नाम दिया और यहां चन्द्रमौलीश्वर शिव की स्थापना कर चन्द्रावती नगरी की नींव रखी। तभी से कार्तिक पूर्णिमा पर इस नदी में स्नान का धार्मिक महत्व स्थापित हुआ और यह स्थल प्रमुख तीर्थ बन गया।
समय के साथ जब श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, तो यह धार्मिक आयोजन धीरे-धीरे एक विशाल व्यापारिक मेले का रूप ले गया। 18वीं सदी में झाला जालिम सिंह ने झालरापाटन की स्थापना के साथ इस मेले को राजकीय संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने मालवा, राजस्थान और गुजरात के नगरों में दूत भेजकर व्यापारियों को आमंत्रित किया और मेले में सुरक्षा, आवास और व्यापारिक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की। इसी काल में चन्द्रभागा नदी में दीपदान की परंपरा का प्रारंभ हुआ, जो आज भी इस मेले का प्रमुख आकर्षण है।
इतिहासकार ललित शर्मा के अनुसार, 1838 ईस्वी में झालावाड़ राज्य की स्थापना के समय झालरापाटन राजधानी थी और तब यह मेला एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक आयोजन के रूप में विकसित हुआ। मेले के संचालन के लिए शासक की अध्यक्षता में समिति गठित होती थी, जिसमें दीवान, उपसभापति, सचिव और अन्य अधिकारी शामिल रहते थे। मेले के मजिस्ट्रेट का कार्य तहसील नाजिम को सौंपा जाता था, जो व्यापार, सुरक्षा और व्यवस्थाओं का जिम्मा संभालते थे।
प्राचीन काल में यह मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि लोक संस्कृति और ग्रामीण मनोरंजन का भी केंद्र था। रात्रि में लोकनाट्य मंचन और दिन में पशु, पक्षी, हस्तकला, बुनाई, कृषि और देहाती खेलों की प्रतिस्पर्धाएँ आयोजित होती थीं। दंगल (कुश्ती) का विशेष आकर्षण रहता था, जिसमें विजेता पहलवान को ‘राज्य पहलवान’ की उपाधि और गदा प्रदान की जाती थी।
राज्य व्यवस्था के समाप्त होने के बाद 1958 ईस्वी में इस मेले का आयोजन राज्य सरकार के पशुपालन विभाग के अधीन आने लगा। तब से इसे आधिकारिक रूप से ‘चन्द्रभागा पशु मेला’ घोषित किया गया। इस मेले में आज भी देश के विभिन्न हिस्सों से पशुपालक ऊँट, घोड़े, गाय, भैंसे और बकरियों की खरीद-बिक्री के लिए आते हैं। विभाग के संरक्षण में यह आयोजन लगभग दस दिन चलता है, जबकि व्यापारिक गतिविधियाँ दो माह तक बनी रहती हैं।
आज भी चन्द्रभागा का कार्तिक मेला श्रद्धा, परंपरा और व्यापार का अद्भुत संगम है — जहाँ एक ओर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं, वहीं दूसरी ओर व्यापारी और पशुपालक अपनी संस्कृति और आर्थिक जीवन को नई दिशा देते हैं। यह मेला राजस्थान की जीवंत परंपरा का वह प्रतीक है जो अतीत की गौरवगाथा को आज भी जनमानस से जोड़ता है।

Suresh Momiya, Jhalawar
नाम: सुरेश कुमार गोयल (मोमिया)
वर्तमान पद: सीनियर पत्रकार (प्रातःकाल)
कार्यक्षेत्र: झालरापाटन, जिला झालावाड़ (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषय
परिचय
सुरेश कुमार गोयल (मोमिया) राजस्थान के झालावाड़ जिले के झालरापाटन क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार हैं। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं। वह झालरापाटन और झालावाड़ जिले से जुड़ी राजनीति, अपराध (क्राइम), शिक्षा, स्वास्थ्य सहित विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय और जनहित की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
पत्रकारिता का अनुभव
पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों का एक लंबा और व्यापक अनुभव है। वर्तमान में वह 'प्रातःकाल' के साथ-साथ निम्नलिखित समाचार पत्रों के लिए भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं:
- दैनिक बढ़ता राजस्थान
- दैनिक कोटा ब्यूरो
- दैनिक दो गज दूरी
शैक्षणिक योग्यता (Education)
उन्होंने वाणिज्य स्नातक (B.Com) की डिग्री हासिल की है।
