गोपाष्टमी पर रेवासा धाम में भक्ति और सेवा का संगम: UDH मंत्री ने किया कामधेनु द्वार और गौ आवास का उद्घाटन
रेवासा धाम में गोपाष्टमी पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। UDH मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कामधेनु द्वार और गौ आवास का उद्घाटन किया। संत बलदेवाचार्य महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में गौसेवा, तुलादान और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।

पलसाना। सीकर जिले के रेवासा धाम स्थित भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन समिति के गौ सेवा केंद्र में गुरुवार को गोपाष्टमी पर्व श्रद्धा, आस्था और भक्ति के वातावरण में मनाया गया। सुबह से ही गौशाला परिसर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सुसज्जित होकर दीपदान किया और सप्त गौमाता मंदिर की परिक्रमा कर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे परिसर में “गो माता की जय” के जयकारों की गूंज सुनाई दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान सरकार के शहरी विकास एवं आवासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा उपस्थित रहे। उन्होंने संत शिरोमणि बलदेवाचार्य महाराज के सान्निध्य में कामधेनु द्वार, गो आवास और कार्यालय का लोकार्पण किया। इस दौरान मंत्री ने तुलादान कर गौ सेवा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि “गौ माता भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं, और गौ सेवा ही सबसे श्रेष्ठ धर्म है।” उन्होंने यह भी आह्वान किया कि हर गांव में एक गोसेवा केंद्र स्थापित होना चाहिए, ताकि परंपरा और संस्कृति का संरक्षण हो सके।
कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री सुभाष महरिया, भाजपा नेता गजानंद कुमावत और बाबू सिंह बाजोर सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने गौशाला की व्यवस्थाओं और गोसेवा की भावना की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। गोशाला समिति के अध्यक्ष पवन मोदी ने बताया कि रेवासा धाम की यह गौशाला न केवल सेवा का केंद्र है बल्कि ग्रामीणों में गौसंरक्षण की भावना जागृत करने का माध्यम भी है।
संत शिरोमणि बलदेवाचार्य महाराज ने कथा के माध्यम से गौ माता की पूजा, रक्षा और उनके महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “गौ माता केवल धार्मिक प्रतीक नहीं बल्कि भारतीय जीवन पद्धति की मूल आत्मा हैं।” उन्होंने महिलाओं से घर में मिट्टी का चूल्हा बनाकर उसी पर भोजन पकाने की परंपरा अपनाने का आग्रह किया, जिससे शरीर और मन सात्विक बने रहते हैं।
गोपाष्टमी उत्सव के अवसर पर सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु, महिला एवं पुरुष भक्तों ने भाग लिया। रैवासा महिला मंडल ने गोशाला को 51 हजार रुपये की भेंट देकर सेवा भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया। वहीं कई भामाशाहों ने भी गौसेवा के लिए उदारता पूर्वक दान दिया। पूरे दिन भक्ति, सेवा और उत्साह का माहौल बना रहा, जिससे रेवासा धाम श्रद्धा और समर्पण का केंद्र बन गया।

Ruturaj Ravan
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