कोटा। रिद्धि-सिद्धिनगर स्थित जैन मंदिर परिसर में चल रहे 151 मण्डलीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के सातवें दिवस सोमवार को श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। धार्मिक वातावरण में मंत्रोच्चार और कलशों की ध्वनि के बीच श्रद्धालु श्रावकों ने 512 अर्घ्य समर्पित कर अपनी आराधना पूर्ण की। विधान के दौरान पूज्य आर्यिका 105 विभाश्री गुरु माँ संसंघ समोशरण में विराजमान रहीं और उपस्थित श्रद्धालुओं को अपने ज्ञानामृत से अभिसिंचित किया।

पूज्य गुरु माँ के समक्ष उपस्थित श्रद्धालुओं ने विविध आध्यात्मिक प्रश्न रखे, जिनका उन्होंने सहज और ज्ञानपूर्ण उत्तर देकर सभी को गहन आत्मचिंतन की दिशा में प्रेरित किया। एक श्रावक द्वारा पूछे गए प्रश्न — “हमारा ऐसा पुण्य उदय कब होगा कि हम स्वयं सिद्धचक्र महामंडल विधान करा सकें?” के उत्तर में पूज्य गुरु माँ ने कहा, “जो जीव निरंतर भगवान की भक्ति करता है, उसका पुण्य संचय बढ़ता है। यही पुण्य उसे एक दिन स्वयं विधान कराने का सौभाग्य प्रदान करता है। जब कोई व्यक्ति पुण्य कार्य की अनुमोदना करता है, तो सातिशय पुण्य का बंध होता है।”

इसी क्रम में कुबेर महाराज द्वारा पूछे गए प्रश्न — “क्या पाप कार्य की अनुमोदना का भी फल मिलता है?” के उत्तर में गुरु माँ ने श्रीपाल की कथा का उदाहरण देते हुए कहा, “प्राचीन काल में श्रीपाल ने एक मुनि की निंदा की और सैकड़ों लोगों ने उसकी अनुमोदना की। परिणामस्वरूप सबको कुष्ठ रोग हुआ। बाद में श्रीपाल ने सिद्धचक्र महामंडल विधान किया, जिससे उसका रोग दूर हुआ और जिन्होंने पुण्य की अनुमोदना की, उनके भी कष्ट मिट गए। अतः पाप की अनुमोदना दुर्गति का और पुण्य की अनुमोदना सद्गति का कारण बनती है।”

इस अवसर पर सौधर्म इन्द्र ने प्रश्न किया — “मनुष्य पर्याय को सार्थक कैसे बनाया जा सकता है?” इस पर पूज्य गुरु माँ ने कहा, “मोहनीय कर्म आत्मा के पवित्र भावों को विकृत करता है और राग-द्वेष उत्पन्न करता है। संसार में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो मोक्ष की अभिलाषा रखते हैं, अधिकांश लोग धन, परिवार और स्वर्ग की कामना में लिप्त रहते हैं। जिनेन्द्र भगवान की भक्ति सब कुछ प्रदान करने वाली है — दरिद्र को धन, पुत्रहीन को पुत्र और अंततः मोक्ष। जीवन को सार्थक बनाने के लिए सच्चे देव, शास्त्र और गुरु की भक्ति का नियम अपनाना चाहिए।”

गुरु माँ ने आगे कहा, “राग-द्वेष से रहित वीतरागता ही जीवन का सच्चा लक्ष्य है। जैन कुल में जन्म लेकर यदि हम भगवान, जिनवाणी और गुरु पर अटूट श्रद्धा रखें, तो यही प्राणी एक दिन स्वयं भगवान बन जाता है।”

कार्यक्रम में मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा ने बताया कि आज की महा आरती का सौभाग्य श्रद्धेय दीपचंद–मंजू देवी तथा अनिल–अंतिमा जैन (मित्तल, झालीजी का बराना) को प्राप्त हुआ, जबकि पादपक्षालन का सौभाग्य नाथूलाल एवं अशोक सांवला परिवार को मिला। इस अवसर पर मंदिर अध्यक्ष राजेंद्र गोधा, मंत्री पंकज खटोड, कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला, पारस लुहाड़िया, राकेश लुहाड़िया, मनोज सेठी, पंकज खटोड़, पारस बज, पारस कासलीवाल, महावीर बडला, बसंतीलाल पाटनी, धर्मचंद हिण्डौली और प्रकाश मेहरूवाला सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

भक्ति और आध्यात्मिकता से ओत-प्रोत यह आयोजन न केवल धर्ममय वातावरण का सृजन कर रहा है, बल्कि जैन समाज में पुण्य और वीतरागता के संदेश को भी सशक्त रूप से स्थापित कर रहा है।

Bhagvati Medatwal, Kota

Bhagvati Medatwal, Kota

नाम: भगवती मेड़तवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर / प्रातःकाल प्रतिनिधि (कोटा)

कार्यक्षेत्र: कोटा (राजस्थान) एवं आमेट तहसील क्षेत्र

बीट (मुख्य विषय): स्थानीय समाचार, राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिज़नेस एवं सभी विषय

परिचय 

भगवती मेड़तवाल 'प्रातःकाल' समाचार पत्र में कोटा प्रतिनिधि और रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह कोटा जिले के साथ-साथ आमेट तहसील क्षेत्र से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को कवर करती हैं। स्थानीय समाचार, प्रशासनिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और राजनीतिक घटनाक्रमों के अलावा आमेट तहसील क्षेत्र से क्राइम (अपराध) और सांस्कृतिक खबरों की रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

उन्होंने कला स्नातक (B.A.) की डिग्री हासिल की है।

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