हर घर एक परिंडा: जैसलमेर के सीमांत गांवों में पक्षियों के संरक्षण की मुहिम
भानु सेवा संस्थान की पहल पर ग्रामीण 45 डिग्री तापमान में पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर जैव विविधता का संरक्षण कर रहे हैं।

जैसलमेर के दव गांव स्थित सच्चे नाथ मंदिर परिसर में भानु सेवा संस्थान के कार्यकर्ता और स्थानीय ग्रामीण पक्षियों के लिए परिंडे स्थापित करते हुए।
भारत-पाक सीमा से सटे रेगिस्तानी इलाकों में भीषण गर्मी के बीच बेजुबान पक्षियों के जीवन की रक्षा के लिए भानु सेवा संस्थान की उप-इकाई दव द्वारा शुरू की गई ‘हर घर एक परिंडा’ पहल अब एक सशक्त और प्रेरणादायी जन-आंदोलन का रूप ले चुकी है। जैसलमेर जिले के सीमावर्ती गांव दव, फुलिया, केशरसिंह का तला, बिंजराज का तला, सत्तो, करड़ा और पोछीणा सहित कई गांवों में इस अभियान को अभूतपूर्व जनसमर्थन प्राप्त हुआ है।
रेगिस्तान की तपती रेत और 45 डिग्री से अधिक तापमान में जहां मानव जीवन भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहीं पक्षियों के लिए पानी और भोजन का अभाव जानलेवा साबित होता है। ऐसे कठिन समय में ‘हर घर एक परिंडा’ पहल आशा की ठंडी छांव बनकर उभरी है।
संस्थान के कार्यकर्ता पदमसिंह करड़ा, चैन सिंह करड़ा, वीरेंद्र सिंह फुलिया, हुकमा राम सत्तो, बिंजराज का तला से फूल सिंह, गुलाब सिंह, हमता राम व मूलसिंह सोढा, भोजराज सिंह गुंजनगढ़ तथा लीला राम वानर दव सहित अनेक स्थानीय सहयोगियों ने घर-घर जाकर ग्रामीणों को जागरूक किया। उनके अथक प्रयासों से प्रेरित होकर ग्रामीणों ने अपने घरों, छतों और सार्वजनिक स्थलों पर मिट्टी के सकोरे (परिंडे) बांधने शुरू कर दिए हैं, जिनमें प्रतिदिन पानी और दाना भरा जा रहा है। इसी दौरान सोमवार को दव स्थित सच्चे नाथ मंदिर परिसर में श्रमदान पश्चात दस परिंडे स्थापित कर दाना-पानी की व्यवस्था की गई।
इस पहल का उद्देश्य केवल पक्षियों को जीवनदान देना ही नहीं, बल्कि समाज में जीव-दया, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं को सशक्त करना भी है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी ने इस अभियान को एक साधारण सेवा कार्य से आगे बढ़ाकर सामाजिक जागरूकता की मिसाल बना दिया है।
ग्रामीणों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के इस दौर में ऐसी पहलें न केवल जैव विविधता के संरक्षण में सहायक हैं, बल्कि लोगों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करती हैं।
‘हर घर एक परिंडा’ आज एक सशक्त संदेश बन चुका है कि छोटे-छोटे प्रयास मिलकर बड़े बदलाव ला सकते हैं। जैसलमेर के सीमांत गांवों से शुरू हुई यह मुहिम अब पूरे जिले के लिए प्रेरणा बन रही है और यह सिद्ध कर रही है कि करुणा और सामूहिक संकल्प से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है। अभियान का मूल संदेश स्पष्ट है कि यह पहल न केवल पक्षियों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है, बल्कि देशभर में एक सकारात्मक संदेश दे रही है कि “अगर हर घर एक परिंडा लगाए तो कोई भी पक्षी प्यासा नहीं रहेगा।”

Pratahkal Bureau
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