गोदाम निर्माण का राजस्थान मॉडल बना मिसाल, अध्ययन के लिए जयपुर पहुंचा यूपी का दल
उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने शासन सचिव डॉ. समित शर्मा से भेंट कर राजस्थान की कम लागत वाली भण्डारण तकनीक और वित्तीय निगरानी प्रणाली की जानकारी ली।

जयपुर के नेहरू सहकार भवन में सहकारिता विभाग के शासन सचिव डॉ. समित शर्मा (दाएं) उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल को राजस्थान के गोदाम निर्माण मॉडल की जानकारी देते हुए।
सहकार से समृद्धि’ अभियान के अंतर्गत संचालित ‘सहकारिता क्षेत्र में विश्व की वृहत् अन्न भण्डारण योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन ने राजस्थान को देश के मानचित्र पर अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है। भण्डारण क्षमता सुदृढ़ीकरण की दिशा में विकसित ‘राजस्थान मॉडल’ अब अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन गया है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण उत्तर प्रदेश सरकार के एक उच्चस्तरीय दल का जयपुर आगमन है। योजना के क्रियान्वयन में देश में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले राजस्थान की कार्यप्रणाली को गहराई से समझने के लिए यह दल वर्तमान में प्रदेश के दौरे पर है।
मंगलवार को नेहरू सहकार भवन में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधिमंडल ने सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां डॉ. समित शर्मा से भेंट की। इस दौरान दल ने राजस्थान में गोदाम निर्माण की जटिल कार्यप्रणाली, इसके सफल वित्तीय मॉडल और सुदृढ़ मॉनिटरिंग सिस्टम की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। डॉ. शर्मा ने चर्चा के दौरान स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा एवं सहकारिता मंत्री श्री गौतम कुमार दक के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण अंचलों में भण्डारण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
राजस्थान मॉडल की विशिष्टता को रेखांकित करते हुए डॉ. शर्मा ने बताया कि यहाँ गोदामों का निर्माण सीधे संबंधित सहकारी समितियों के माध्यम से कराया जा रहा है। इस रणनीति के फलस्वरूप मध्यस्थ एजेंसियों का कमीशन समाप्त हो गया है, जिससे निर्माण लागत में भारी गिरावट आई है। वर्तमान में राजस्थान में गोदामों का निर्माण मात्र 4000 से 5500 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से किया जा रहा है, जो कि अन्य राज्यों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है। इसके अतिरिक्त, विभाग द्वारा की जा रही निरंतर निगरानी एवं गुणवत्ता नियंत्रण ने इन निर्माण कार्यों को विश्वसनीय बनाया है।
प्रशासनिक एवं मानक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए शासन सचिव ने बताया कि सभी गोदामों का निर्माण डब्ल्यूडीआरए के कड़े मानकों एवं मापदण्डों के अनुरूप सुनिश्चित किया गया है। राजस्थान की इस सफलता का एक बड़ा आधार यहाँ की उदार सब्सिडी नीति है, जिसके तहत राज्य सरकार प्रत्येक गोदाम के लिए 25 लाख रुपये की सब्सिडी प्रदान कर रही है। उल्लेखनीय है कि गोदाम निर्माण हेतु शत-प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराने वाला राजस्थान देश का एकमात्र राज्य है। इन गोदामों के व्यावसायिक और अधिकतम उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभाग ने उन्हें किराये पर उपलब्ध कराने हेतु एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) भी जारी की है।
परियोजना के विस्तार और भविष्य के लक्ष्यों पर जानकारी देते हुए डॉ. शर्मा ने बताया कि राज्य में 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले कुल 250 गोदामों के निर्माण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित है। इस योजनाबद्ध विकास के तहत वर्ष 2024-25 में 100, वर्ष 2025-26 में 100 तथा वर्ष 2026-27 में 50 गोदामों का निर्माण किया जाना है, जिससे प्रदेश में कुल 1.25 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त भण्डारण क्षमता सृजित होगी। प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024-25 के आवंटित 98 गोदामों का निर्माण पूर्ण हो चुका है, जबकि वर्ष 2025-26 के 91 गोदाम निर्माणाधीन हैं और आगामी वर्ष के लिए चयन की प्रक्रिया निरंतर जारी है।
इस अध्ययन यात्रा के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त रजिस्ट्रार (प्रोसेसिंग) श्री शुद्धोधन उज्ज्वल एवं संयुक्त रजिस्ट्रार (प्रोसेसिंग) श्रीमती कल्पना जोशी के साथ तकनीकी एवं प्रशासनिक बारीकियों पर गहन विमर्श किया। सैद्धांतिक चर्चा के साथ-साथ दल ने विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण कर निर्माणाधीन एवं पूर्ण हो चुके गोदामों का भौतिक निरीक्षण किया और मौके पर कार्यप्रणाली का अवलोकन किया। उत्तर प्रदेश के इस प्रतिनिधिमंडल में उत्तर प्रदेश राज्य निर्माण एवं श्रम विकास सहकारी संघ लिमिटेड के मुख्य अभियंता श्री परीक्षित त्रिपाठी, अधिशासी अभियंता श्री सतेन्द्र सिकरवार तथा एफसीआई के सहायक महाप्रबंधक श्री प्रतीक के. शर्मा सम्मिलित हैं, जो राजस्थान के इस सफल मॉडल को अपने राज्य में लागू करने की संभावनाओं पर रिपोर्ट तैयार करेंगे।

Pratahkal Bureau
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